लखनऊ। अल्कोहिक ही नहीं बल्कि नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लीवर रोगों के लगातार लोगों में मामले बढ़ रहे हैं,अगर देखा जाए ,तो इसका कारण तेजी बदलती जीवनशैली है। यह जानकारी बीसी राय पुरस्कार विजेता व लिवर प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डा.आनंद के खाखर ने शनिवार को हजरतगंज स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने कहा कि लीवर की बीमारियों की रोकथाम के लिए जिस मुख्य घटक पर विचार किया जाना चाहिए वह है लोगों में जागरूकता उत्पन्न करना। 90 प्रतिशत से अधिक लोग यह नहीं जान पाते हैं कि उनका लीवर संक्रमित है । जिसके कारण वो इलाज काफी देर से इलाज शुरू करते हैं।
उन्होंने बताया कि एक स्वास्थ्य जीवनशैली जीने, स्वस्थ रहने, कम शराब पीने, सुरक्षित चिकित्सीय अभ्यास करने से लीवर की बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में हेपेटाइटिस बी,सी जैसी बीमारियों के उपचार के लिए कई दवाइयाँ और टीके लाये गयें हैं और साथ ही भारत में लीवर का प्रतिरोपण 94 प्रतिशत मामलों में सफल हो चुका है। इसके अलावा, भारत में लीवर के प्रतिरोपण की लागत पश्चिमी देशों की तुलना में एक बीसवां भाग है।
राजधानी में शुरू हुयी अपोलो अस्पताल की लीवर क्लीनिक
चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल के सहयोग से लखनऊ में एक लीवर क्लीनिक को चलाया जा रहा है। लीवर क्लीनिक का उद्घाटन अपोलो अस्पतालों के लीवर के रोगों और प्रतिरोपण दल (सीएलडीटी) के सामूहिक कार्यक्रम निदेश एवं वरिष्ठ परामर्शक डॉ आनंद के खाखर द्वारा किया गया था। सर्जन डॉ आनंद के खाखर प्रत्येक महीने की आखरी शनिवार को लीवर क्लीनिक में मरीजां को देखेगें।
अपोलो अस्पतालों की सीएलडीटी दल को देश में सबसे अधिक संख्या में सफलता पूर्वक लीवर प्रतिरोपण का श्रेय प्राप्त है। दल ने 10 वर्षों की अवधि में जीवित और मृत दाताओं दोनों से सकल रूप से 800 से अधिक प्रतिरोपण किया है जिससे यह इसकी शुरुआत से लेकर इतने कम समय अवधि में दक्षिण भारत में सर्वोच्च बन गया है।
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