लखनऊ। हार्ट डिजीज से बचने के लिए व्यायाम, खेल- कूद, फास्ट फूड का परहेज तथा नियमित दिनचर्या का पालन करने के लिए ज्यादातर कार्डियक विशेषज्ञ मरीजों को परामर्श देते है। परन्तु हार्ट डिजीज से बचने के लिए अभिभावक खुद व अपने बच्चों को जागरूक करें तो आने वाले वर्षो में हार्ट डिजीज को निंयत्रित कि या जा सकता है। यह जानकारी डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान के कार्डियक विभाग के विशेषज्ञ डाक्टर भुवन तिवारी ने विश्व हार्ट दिवस पर दी।
डा. तिवारी ने बताया कि इस बार विश्व हार्ट दिवस पर थीम माई हार्ट योर हार्ट है। इसमें महत्वपूर्ण यह है कि हार्ट को स्वस्थ्य रखना है। उन्होंने बताया कि डाक्टर मरीज की बीमारी होने पर उसे दवा, बचाव के बारे में व जागरूक तो किया जा सकता है। परन्तु हार्ट को स्वस्थ्य रखने की जानकारी व जागरूकता एक अभिभावक ही बेहतर तरीके से अपने बच्चों को दे सकता है।
डा. तिवारी ने बताया कि अभिभावक या अन्य व्यक्ति खुद को स्वस्थ रखने के लिए सुबह पार्क में टहलने, व्यायाम व योग सहित अन्य विकल्पों को अपनाता है, परन्तु वह अपने बच्चों का इसके लिए जागरूक नहीं कर पाता है। उन्होंने बताया कि अगर देखा जाए तो वर्तमान में ज्यादातर बच्चों मोबाइल गेम में व्यस्त रहना, खेलने के लिए नहीं जाना, फास्ट फू ड का सेवन ज्यादा करना आदि शामिल रहता है। ऐसे में अगर अभिभावक खुद हेल्दी फूड का सेवन करने के अलावा पढ़ाई के साथ व्यायाम, टहलने या निर्धारित समय में खेलने की आदत डाले, तो आने वाले वर्षो में बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होगा आैर वह विभिन्न बीमारियों से भी बचे रहेंगे।
यह अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि इस प्रक्रिया को रोचक बना कर कैसे जागरूक करे। डा. तिवारी बताते है कि अगर देखा जाए तो वर्तमान में युवा वर्ग में बीस से तीस वर्ष में लोगों को हार्ट अटैक ज्यादा देखा जा रहा है। यह गम्भीर विषय है। अनियमित दिन चर्या, व्यायाम, टहलना आदि के अलावा हेल्दी फूड का सेवन न करना हार्ट अटैक का कारण बन रहा है। इनमें तम्बाकू का सेवन किसी न किसी रूप में करने के कारण भी हार्ट डिजीज का होना देखा गया है। उन्होंने बताया कि अब महिलाओं में भी हार्ट अटैक की संख्या बढ़ी है। महिलाएं देर से इलाज कराने के लिए पहुंची है।
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