यदि आपके बच्चे को जन्म के बाद ६० दिन तक पीलिया की शिकायत रहें। उसे बुखार भी आ रहा हो तो बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। हो सकता है कि बच्चे की पित्त की नली न हो। कुछ बच्चों में जन्मजात पित्त की नली नहीं होती है। इस समस्या को विलरीएटरेजिया कहते हैं। यह जानकारी पीजीआई के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के प्रमुख और संस्थान के डीन डॉ. राजन सक्सेना ने रविवार को दी।
पीजीआई में २१वां सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी वीक शिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। रविवार को भी पीजीआई के टेलीमेडिसिन सभागार में कोलो रेक्टल, पोर्टल हाईपरटेंशन समेत पेट से संबंधित बीमारियों में होने वाली सर्जरी के बारे में देश भर से आये विशेषज्ञों ने युवा डॉक्टरों को जागरूक किया। रविवार को डॉ. ए. रमेश, डॉ. पुनीत धर, डॉ. पीयूष साहनी, डॉ. एसके माथुर, डॉ. एके गुप्ता, डॉ. आरए. शास्त्री, डॉ. चेतन कनथरिया, डॉ. एसके माथुर, डॉ. एसएस सिकोरा, डॉ. अनु बिहारी, डॉ. आनंद प्रकाश, डॉ. अशोक कुमार सेकेंड, डॉ. प्रवीन भाटिया, डॉ. विकास गुप्ता, डॉ. अंकुर भटनागर समेत विभिन्न सर्जन ने सर्जरी की विभिन्न प्रकार की नई तकनीक पर चर्चा की।
डॉक्टर से कराते रहें जांच –
पीजीआई के डीन डॉ. राजन सक्सेना ने बताया कि पित्त की नली का घेरा तीन से चार मिमी. होता है, लेकिन जन्मजात परेशानी से एक यह थैली का रूप धारण कर लेता है, जिसमें पित्त और जूस इक_ïा होने लगता है। बच्चे को पीलिया और बुखार की परेशानी होती है। ऐसे मामलों में सर्जन्स बच्चे में नयी पित्त की थैली बनाते हैं। पर, परिवारीजनों को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिये कि जन्मजात परेशानी वाले बच्चे को हर वर्ष सर्जन को फालोअप में दिखाते रहना चाहिये।
यह देखा गया कि १० फीसदी मामलों में नली के जोड़ में कैंसर, पथरी की परेशानी होती है, जिससे कई बार पैंक्रियाज में सूजन होने लगती है। ऐसे मामलों में जोड़ और उस हिस्से को भी सर्जरी करके निकालना पड़ जाता है, जहां दिक्कत होती है।
खराब हो सकते हैं कई आर्गन –
जबलपुर मेडिकल कॉलेज के सर्जन डॉ. धनंजय शर्मा ने बताया कि पेट में लीकेज होने पर कई बार पस पड़ जाता है। इससे मरीज को सेप्टिक हो जाता है। ऐसे में मामलों में पहले पस को इंटरवेंशन रेडियो तकनीक से ड्रेन करना चाहिये। फिर सर्जरी करना सही रहता है। उन्होंने बताया कि अमाशय को जब भी निकालना पड़ता है तो लीकेज रोकना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि १००० मरीजों में से १५ फीसदी लोगों को दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है।
गूगल पर सर्च कर लें सर्जन –
पीजीआई के गैस्ट्रो सर्जन डॉ. आनंद प्रकाश व डॉ. अशोक कुमार सेकेंड ने बताया कि आज के समय में यह बहुत जरूरी है कि आपको सही डॉक्टर और सर्जन के पास इलाज के लिये जाना होगा। इसके लिये गूगल पर भी डॉक्टर को बीमारी से सर्च करना चाहिये। गूगल पर बेहतर डॉक्टर की जानकारी जुटा लेने पर ही इलाज करायें। यह जरूर याद रखें कि हर चमक-धमक और संगमरमर से बने ही अस्पताल में बेहतर सर्जन या डॉक्टर मिलेगा। जरूरी नहीं है कि जो महंगा हो वह अच्छा हो। सर्जरी उसी संस्थान या सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में करानी चाहिये, जहां पर डॉक्टर के पास बेहतरीन अनुभव और सपोर्टिंग सुविधा हो।

















