लखनऊ। सीएमओ डा. जीएस बाजपेयी ने शनिवार को ऐशबाग बाल महिला अस्पताल में प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी करायी, तो अस्पतालों में एनेस्थिसिया डाक्टरों की कमी उजागर हो गयी। इन अस्पतालों में एनेस्थिसिया डाक्टरों की कमी के चलते अक्सर प्रसूताओं को रेफर कर दिया जाता है। सीएमओ डा. बाजपेयी का कहना है कि एनेस्थिसिया डाक्टर होने के नाते ड¬ूटी की है। डाक्टरों की कमी को दूर करने की कोशिश लगातार की जा रही है।
राजधानी के आठ बाल महिला अस्पतालों में एनेस्थिसिया डाक्टरों की कमी बनी हुई है। इन अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी कराने में डाक्टरों को दिक्कतों का सामना करना करना पड़ रहा है। कहीं भी किसी बाल महिला अस्पताल में सीजिरियन डिलीवरी कराने के लिए एनेस्थिसिया के स्थायी डाक्टर नहीं है। संविदा पर अलीगंज, इंदिरा नगर व एनके रोड पर एनेस्थिसिया के डाक्टर तो तैनात है। इस कारण यहां तो सिजेरियन आपरेशन कराने में कोई खास दिक्कत नहीं आती है, लेकिन अन्य बाल महिला अस्पतालों में एनेस्थिसिया के डाक्टर ऑन काल रखे गये है। ऐसे में प्रसूता के आने के बाद डाक्टर तत्काल एनेस्थिसिया डाक्टर को कॉल करता है।
अगर उसके आने में देर हो जाती है तो उसे रेफर कर दिया जाता है। अक्सर ऐसा होता है कि एनेस्थिसिया डाक्टर निजी क्षेत्र का होने के कारण कहीं न कही निजी अस्पताल में बिजी होता है आैर आने में देर हो जाती है। यही शनिवार को भी हुआ, जब सीएमओ डा. जीएस बाजपेयी ऐश बाग बाल महिला अस्पताल पहुंचे तो प्रसूताओं को रेफर करने की तैयारी चल रही थी। ऐसे में खुद एनेस्थिसिया डाक्टर होने के नाते उन्होंने प्रसूताओं को एनेस्थिसिया देकर आपरेशन कराया। डा. जीएस बाजपेयी का कहना है कि एनेस्थिसिया डाक्टरों की कमी को दूर करने की कोशिश की जा रही है। जल्द ही शासन ने निर्देश पर डाक्टरों को साक्षात्कार लिया जाएगा।











