कार्नियल प्रत्यारोपण के लिए लोगों में जागरुकता आवश्यक

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लखनऊ।कॉर्नियल अंधत्व और प्रत्यारोपण के बीच की खाई को पाटना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कॉर्नियल अंधत्व अधिकांश मामलों में रोके जाने योग्य और उपचार योग्य है, फिर भी दाता ऊतक की कमी और तंत्र की अक्षमताओं के कारण हजारों लोग दृष्टिबाधित बने रहते हैं। प्रत्येक सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण केवल दृष्टि ही नहीं लौटाता, बल्कि स्वतंत्रता, शिक्षा, रोजगार के अवसर और सम्मान भी पुनर्स्थापित करता है—विशेषकर युवाओं और कार्यशील आयु वर्ग के लोगों में। National Organ and Tissue Transplant Organization जैसे संस्थानों के माध्यम से समन्वय को सुदृढ़ करना तथा National Programme for Control of Blindness and Visual Impairment के अंतर्गत प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना प्रतीक्षा सूची को कम कर सकता है इसलिए इस अंतर को समाप्त करना केवल एक चिकित्सीय आवश्यकता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य प्राथमिकता है, जो समानता, आर्थिक उत्पादकता और सामाजिक कल्याण को आगे बढ़ाती है।

सत्र का उद्घाटन अमित कुमार घोष, भा.,प्र.,से., चिकित्सा शिक्षा विभाग, प्रो. आर. के. धीमन, निदेशक, .पी.जी.आई.एम.एस., डॉ. अनिल कुमार, निदेशक, NOTTO, प्रो. शालीन कुमार, डीन, पी.जी.आई प्रो. राजेश हर्षवर्धन, संयुक्त निदेशक, सॉट्टो – उ. प्र. एवं चिकित्सा अधीक्षक पी.जी.आई प्रो. विकास कन्नौजिया
सत्र का शुभारंभ डॉ. राजेश हर्षवर्धन, संयुक्त निदेशक, सॉट्टो,. के स्वागत उद्बोधन से हुआ।

इसके पश्चात प्रो. विकास कन्नौजिया, विभागाध्यक्ष ने कहा कॉर्नियल संक्रमण एवं आघात की रोकथाम तथा समयबद्ध उपचार के साथ-साथ स्वैच्छिक नेत्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. शेफाली मजूमदार, नेत्र विज्ञान विभाग, एस.एन.एम.सी., आगरा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इन कमियों को दूर करने हेतु डेटा-आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है।

डॉ. अनिल कुमार, निदेशक, NOTTO ने कहा कि अंग एवं ऊतक दान की सुदृढ़ संस्कृति विकसित करने के लिए केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं। प्रो आर के धीमन निदेशक, पी.जी.आई‌ ने कहा कि प्रत्यारोपण समन्वयक सहानुभूतिपूर्ण मार्गदर्शन, समयबद्ध प्राप्ति प्रक्रिया तथा नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित कर प्रणाली में विश्वास को सुदृढ़ करते हैं तथा दान की गरिमा को बनाए रखते हैं।

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वैज्ञानिक सत्रों में राज्य के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों—प्रो. शालिनी मोहन (निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी, जी.एस.वी.एम., कानपुर), प्रो. एस. पी. सिंह (रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी, प्रयागराज), प्रो. अल्का गुप्ता (एल.एल.आर. एम. सी., मेरठ), डॉ. शेफाली मजूमदार (एस.एन.एम.सी., आगरा), डॉ. अभिषेक चंद्रा (निदेशक, नेत्रोदय द आई सिटी, वाराणसी) सहित अन्य विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

आई बैंक एवं आई रिट्रीवल केंद्रों का कार्यप्रणाली,मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOA) एवं NPCB दिशा-निर्देशों के अंतर्गत नियामकीय प्रावधान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ दान प्रणाली को सुदृढ़ करने में प्रत्यारोपण समन्वयकों की भूमिका है।

उद्घ सत्र के दौरान “From Hope to Healing: A Prac. राजेश हर्षवर्धन के मार्गदर्शन में लिखी गई है। यह अवसर उस दिन की एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि के रूप में चिन्हित हुआ। पुस्तक का विमोचन अत्यंत सराहना के साथ किया गया।

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