एंटीबायोटिक दवाओं का धड़ल्ले से प्रयोग खतरे की घंटी :डा.राजेश

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लखनऊ। एंटीबायोटिक दवाओं का धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल आने वाले समय में मानव जाति के लिए बड़ा ही घातक साबित होने वाला है। यदि इसी तरह से एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल जारी रहा तो आने वाले समय में लोग डायरिया जैसी बीमारियों की चपेट में आकर जान गंवाने लगेंगे। एंटीबायोटिक दवाओं के लगातार इस्तेमाल से वैक्टीरिया उस दवा के अनुकूल अपने आप को बदल लेता है। जिससे एंटीबायोटिक दवाओं का बीमारी में असर धीरे-धीरे समाप्त होता जाता है। यह कहना है एसजीपीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा.राजेश हर्षवर्धन का। वह बुधवार को एसजीपीजीआई में माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में आये विशेषज्ञों को सम्बोंधित कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि आज के समय में बहुत से लोग अपने आप भी बिना चिकित्सकीय सलाह के बीमारी होने पर एंटीबायोटिक का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। जो बहुत ही खतरनाक है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि जिस हिसाब से समाज में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उससे आने वाले समय में जो एंटीबायोटिक दवा लगातार खाते है वो तो चपेट में आयेंगेे ही और जो नहीं खाते हैं वो भी इसका खामियाजा भुगतेंगे। इसके अलावा उन्होंने बताया कि आजकल मांसाहार का सेवन बढ़ रहा है। जिसमें सबसे ज्यादा मुर्गीयों का मांस काफी पंसद किया जाता है। इन मुर्गियों को जल्द से जल्द बड़ा करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मुर्गीयों को जल्द बड़ा करने के लिए एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर मौजूदा समय में कोई सख्त नियम नहीं है। इस कार्यशाला में भारत सरकार की संस्था एनसीडीसी से डा.सुनील गुप्ता ने जल्द ही कोई ठोस नियम बनाने पर चर्चा की है। इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजन सचिव एसोसिएट प्रोफेसर डा.रिचा मिश्रा मौजूद रहीं।

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