गुड न्यूज: अमेरिका में बनी कैंसर की दवा, जल्द ही यहां भी मिलेगी

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Pills on a person's palm

लखनऊ । अमरीका में बनी दवाएं जल्द ही भारतीय मरीजों को भी मिल सकेगी। स्तन व यूरेनरी ब्लैडर (मूत्राशय) के कैंसर के इलाज में प्रयोग होने वाली नयी दवा जल्द ही दवा बाजार में उपलब्ध होंगी। अमेरिका में टारगेट बेस्ड थेरेपी की दवाओं को मंजूरी मिल गयी है। इसका डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में फार्माकोलेटर जारी हुआ ंहै। फार्मोकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल जैन के मुताबिक दिसंबर में नयी बनी दवाओं पर अध्ययन किया गया। नयी दवाएं इलाज में मददगार साबित होंगी। सटीक इलाज के साथ महंगे इलाज से भी मरीजों को बचाने में मदद मिलेगी।

अमेरिका के खाद्य एंव औषधि विभाग (एफएसडीए) ने स्तन कैंसर की दवा फेम-ट्रस्टोजुमेब डजर्टीकेन-एनएक्सकेआई दवा को मंजूरी दी है। यह दवा सीधे कैंसर कोशिकाओं व हार्मोन पर वार करती है। इसी प्रकार यूरेनरी ब्लैडर के लिए एनफर्चुमेब विडोटर-ईजेएफवी दवा बनाई गई है। यह दवा कैंसर सेल्स पर एंटीबॉडी की तरह काम करेगी। इस दवा के कारण स्वस्थ्य कोशिकाओं को नुकसान नहीं होगा। इसके अलावा ग्लोडीरसेन दवा जीन थेरेपी है। इसके जरिए कमजोर मांसपेशियां दुरुस्त की जा सकेंगी। यही नहीं ल्यूमाटेपर वन-टॉसीलेट मानसिक बीमारी शिजोफ्रेनिया में कारगर होगी। यूब्रोजीपेंट माइग्रेन की नयी दवा होगी। इससे सिर दर्द के साथ बीमारी पर काबू पाना आसान होगा।

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