इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर की हाईटेक अपडेट, रिसर्च के साथ हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग देंगे विशेषज्ञ डॉक्टर

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लखनऊ में ‘EMPARV इंटरनेशनल 2026’ का भव्य शुभारंभ

AEME और SGPGIMS के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह चार दिवसीय कॉन्फ्रेंस

लखनऊ। इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन के क्षेत्र में वैश्विक मापदंड स्थापित करने वाली अंतरराष्ट्रीय एकेडमिक पहल ‘EMPARV इंटरनेशनल 2026’ का उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शानदार आगाज हुआ है। ‘एसोसिएशन ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन एजुकेटर्स’ (AEME) और ‘संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ (SGPGIMS) के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह चार दिवसीय कॉन्फ्रेंस 20 से 23 अगस्त 2026 तक संचालित हो रही है। “इमरजेंसी मेडिसिन: तैयारी, गंभीरता, रिससिटेशन (पुनर्जीवन) और बहुमुखी प्रतिभा” की मुख्य थीम पर आधारित इस महाकुंभ में भारत सहित विदेशों से सैकड़ों डॉक्टर, रिसर्चर्स, एकेडमिक्स और नर्सिंग प्रोफेशनल्स हिस्सा ले रहे हैं।

​व्यावहारिक कौशल और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग पर केंद्रित शुरुआती दो दिन
​परंपरागत व्याख्यान-आधारित सम्मेलनों से इतर, इस आयोजन में व्यावहारिक और इंटरएक्टिव शिक्षण विधियों को प्राथमिकता दी गई है। शुरुआती दो दिनों में सिमुलेशन, हैंड्स-ऑन स्टेशन्स, केस डिस्कशन और सिनेरियो-बेस्ड लर्निंग के ज़रिए प्रतिभागियों को क्रिटिकल केयर के आधुनिक गुर सिखाए गए।
​20 अगस्त (प्रथम दिवस): फ्रंटलाइन इमरजेंसी रिस्पॉन्स को मजबूत करने के लिए “रैपिड रिस्पॉन्स: सीखें। काम करें। जानें बचाएं” और ‘एक्यूट केयर नर्सिंग’ वर्कशॉप्स आयोजित की गईं। इनमें गंभीर रूप से बीमार मरीजों की त्वरित पहचान, उन्हें स्थिर करने और सतत देखभाल में जूनियर डॉक्टरों व नर्सों की भूमिका पर केंद्रित प्रशिक्षण दिया गया।

​21 अगस्त (द्वितीय दिवस): SGPGIMS और KGMU में एक साथ 21 से अधिक गहन वर्कशॉप्स का संचालन हुआ। इनमें बेडसाइड अल्ट्रासाउंड, हेमोडायनामिक असेसमेंट, प्रसूति संबंधी आपात स्थिति, न्यूरोक्रिटिकल केयर, मैकेनिकल वेंटिलेशन, ट्रॉमा और ईसीजी जैसे अहम विषयों को कवर किया गया।
​अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की सहभागिता और वैश्विक दृष्टिकोण
​सम्मेलन की एक प्रमुख उपलब्धि एसजीपीजीआई में आयोजित “मरीजों की सुरक्षा, मानवीय पहलू और बातचीत – वैश्विक नजरिए” विषयक विशेष सत्र रहा।

इसमें विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन चिकित्सा सेवा केवल क्लिनिकल ज्ञान या तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावी संवाद, टीमवर्क और सिस्टम डिजाइन के ज़रिए रोकी जा सकने वाली मानवीय गलतियों को न्यूनतम करना बेहद आवश्यक है।
​यूके, यूएसए, सिंगापुर और यूरोप के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों से आए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भारतीय डॉक्टरों और ट्रेनीज़ के साथ अपने अनुभव साझा किए। यूके के रॉयल डर्बी हॉस्पिटल से आए इमरजेंसी मेडिसिन कंसल्टेंट प्रो. वेंकट कोटमराजू, AIIMS पटना और SGPGIMS के विषय-विशेषज्ञों ने वैश्विक स्तर की तकनीकों को भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली की जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप ढालने की रणनीति पर प्रकाश डाला।

​आगामी सत्रों में एडवांस्ड कार्यक्रमों पर रहेगा जोर
​21 अगस्त से शुरू हुए दो-दिवसीय गहन सत्र (जो 22 अगस्त को भी जारी रहेंगे) में इमरजेंसी न्यूरोलॉजिकल लाइफ सपोर्ट (ENLS), एडवांस्ड वेंटिलेशन और साइंटिफिक राइटिंग एंड पब्लिशिंग जैसे विषय शामिल हैं। EMPARV इंटरनेशनल 2026 के अंतिम दो दिनों (22 और 23 अगस्त) में कई अन्य एडवांस्ड वर्कशॉप्स और साइंटिफिक प्रेजेंटेशन्स का आयोजन होगा, जो देश-विदेश के इमरजेंसी सिस्टम्स और मेडिकल एजुकेशन को एक नए मुकाम पर ले जाने में सहायक साबित होंगे।

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