सुपरबग का गढ़ बनीं अयोध्या के अस्पतालों की नालियां, रिसर्च में हुआ खौफनाक खुलासा

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​अयोध्या। अस्पतालों से निकलने वाला अपशिष्ट पानी अब न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी एक बड़े जैविक खतरे का रूप ले चुका है। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा किए गए एक हालिया शोध में अयोध्या शहर के नौ प्रमुख अस्पतालों की नालियों में जानलेवा ‘सुपरबग्स’ की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।

​91.6% बैक्टीरिया पर बेअसर हुईं एंटीबायोटिक दवाएं
रिसर्च के दौरान अस्पतालों के सीवेज से लिए गए पानी के नमूनों में कुल 179 प्रकार के बैक्टीरिया की पहचान की गई। प्रयोगशाला जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:
​मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट (MDR): पाए गए कुल बैक्टीरिया में से 91.6% बैक्टीरिया पर आम एंटीबायोटिक दवाओं का कोई असर नहीं हो रहा है।

​एक्सटेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट (XDR): 31 बैक्टीरिया अत्यंत घातक श्रेणी के मिले, जिन पर कई मजबूत दवाएं निष्प्रभावी साबित हुईं।
​पैन-ड्रग रेजिस्टेंट (PDR): सबसे खौफनाक स्थिति 3 अति-दुर्लभ बैक्टीरिया में देखी गई, जो लगभग सभी उपलब्ध एंटीबायोटिक्स से पूरी तरह प्रतिरोधी (प्रतिरोध क्षमता विकसित कर चुके) हो चुके हैं। इनमें ई-कोलाई, शिगेला और प्रोटियस का एक-एक सैंपल शामिल है।

​शहर के 9 प्रमुख अस्पतालों से लिए गए थे सैंपल
विश्वविद्यालय की टीम ने अध्ययन के लिए शहर के सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों के अस्पतालों के ड्रेनेज सिस्टम को शामिल किया था:
​दर्शननगर स्थित मेडिकल कॉलेज (2 लोकेशन)
​जिला अस्पताल एवं महिला जिला अस्पताल
​श्रीराम अस्पताल और लेप्रोसी मिशन हॉस्पिटल
​चिरंजीवी, किशन एवं संजीवनी हॉस्पिटल
​स्यूडोमोनास 100% दवा-प्रतिरोधी, ई-कोलाई भी बेकाबू

एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव की जांच में सामने आया कि स्यूडोमोनास बैक्टीरिया के सभी 13 सैंपल (100%) दवा-प्रतिरोधी पाए गए। इसके अलावा क्लेबसिएला के 96.87% और ई-कोलाई के 95.23% सैंपल MDR श्रेणी के निकले। वैज्ञानिकों के अनुसार, पेनिसिलिन, एरिथ्रोमाइसिन और क्लिंडामाइसिन जैसी रोजमर्रा की एंटीबायोटिक्स के खिलाफ बैक्टीरिया में सबसे ज्यादा प्रतिरोध दर्ज किया गया है, जो आने वाले समय में गंभीर संक्रमण के इलाज को बेहद चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

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