अत्याधुनिक तकनीक से लंग डिजीज व कैंसर की होगी सटीक पहचान:प्रो. वेद प्रकाश

0
22

लखनऊ । लंग डिजीज और कैंसर जैसी क्रिटिकल डिजीज की सटीक जांच अब और आसान होगी। राजधानी की किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में एडवांस इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टर पहुंचे। यहां उन्होंने उटकरण और तरीकों की ट्रेनिंग दी, जिससे बिना किसी बड़े ऑपरेशन के फेफड़ों के अंतरिक्ष हिस्सों की जांच और इलाज किया जा सके।

सम्मेलन में फेफड़ों के कैंसर में पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की भूमिका पर चर्चा की गई। पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रो वेद प्रकाश ने बताया- विभाग आधुनिक ब्रोंकोस्कोपी, EBUS से जांच, स्टेजिंग, इमेज-गाइडेड प्रोसेस के साथ में काम करता है। इससे समस्या खत्म हो जाती है।

एआईपीकॉन 2026 में व्यावहारिक कौशल विकास कार्यशाला पर प्रेजेंटेशन दिया गया। सम्मेलन इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, थोरेसिक ऑन्कोलॉजी और एडवांस्ड रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में तकनीक की जानकारी दी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ भी एक साथ पहुंचे हैं। इससे केजीएमयू की स्थिति श्वसन चिकित्सा के क्षेत्र में मजबूत होगी।

सम्मेलन में अमेरिका के डॉक्टर आशुतोष सचदेवा भी शामिल हुए। उन्होंने पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी को आगे बढ़ाने, फेफड़ों के कैंसर को खत्म करने और सहयोग को बढ़ावा देने के बारे में बताया।

रोबोटिक नेविगेशन और क्रायो (बर्फ वाली तकनीक) के जरिए बायोप्सी लेने के तरीके के बारे में बताया गया। मेरठ के डॉ. वीरौत्तम तोमर ने इस प्रक्रिया को करने का आसान और चरण-दर-चरण तरीका समझाया। पीजीआई के डॉ अजमल खान ने छाती के इलाज में कॉन्वेक्स प्रोब ईबीयूएस के बढ़ते प्रयोग और इसके इलाज में फायदों के बारे में जानकारी दी।

सम्मेलन में मरीजों के इलाज प्रक्रिया को लाइव दिखाया गया। इसके साथ ही नए डॉक्टर्स की समस्याओं का निराकरण किया गया। पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि इमरजेंसी (ICU) में ब्रोंकोस्कोपी कैसे जान बचा सकती है। बेंगलुरु के डॉ बाशा जलाल खान ने फेफड़े के प्रत्यारोपण के बाद की सावधानियों पर जानकारी साझा की।

हैदराबाद के डॉ. वी प्रतिभा ने फेफड़ों के कोनों (परिधीय फुफ्फुसीय घावों) में गहराई तक स्थित कैंसर या बीमारियों की सटीक जांच के लिए उन्नत उपकरणों की जानकारी दी।उन्होंने बताया कि नयी तकनीकें जैसे ईबीयूएस (EBUS), नेविगेशनल ब्रोंकोस्कोपी, या रेडियल प्रोब का उपयोग करके, बिना चीरा लगाए फेफड़ों के टुकड़ों से भी सटीक बायोप्सी किया जा सकता है, जिससे जल्दी और सटीक इलाज में मदद मिलती है।

Previous articleमहाशिवरात्रि पर बन रहे है शुभ योग: ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here