लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में कोरोना मरीज भर्ती प्रकरण में आज रिपोर्ट नहीं सौपी जा सकी। जांच कमेटी ने बृहस्पतिवार को जूनियर-सीनियर डॉक्टरों के बयान दर्ज किया गया। बताया जाता है कि तीमारदारों का बयान में फंसना तय है आैर इसके साथ ही जांच में निजी स्तर पर इलाज कर रहे एक अन्य वरिष्ठ डाक्टर का भी फंस सकता है। हालांकि केजीएमयू में चर्चा में निजी स्तर पर इलाज करने वाला डाक्टर का नाम मालूम है, लेकिन अभी लिखित शिकायत या बयान में इस डाक्टर का नाम नहीं आया है।
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में ग्यारह अप्रैल को 64 वर्षीय कोरोना मरीज को भर्ती किया गया था। कोरोना का मरीज होने के कारण 65 डॉक्टर, स्टाफ क्वारंटाइन में चले गये थे। बीस डाक्टर व स्टाफ जांच के बाद निगेटिव भी आ गये। इस दौरान ट्रॉमा सेंटर में वरिष्ठ डाक्टर के अलावा, रेजीडेंट के साथ-साथ तीमारदारों का भी लिखित पक्ष लिया गया है। बताया जाता है कि जांच तीमारदारों ने बयान में मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री छिपाना, 12 दिन तक बीमारी के लक्षण होने के बाद भी सीएमओ कंट्रोल रूम जानकारी न देने से तीमारदारों का एपेडमिक एक्ट की कार्रवाई में फंसना तय है। इसके साथ अगर तीमारदारों ने बयान में पारदर्शिता बरती तो केजीएमयू के एक अन्य वरिष्ठ डाक्टर का फंसना तय हो गया है। बताया जाता है कि यह कोरोना पाजिटिव मरीज निजी स्तर पर इलाज कर रहा था। तबियत बिगड़ने पर इसी डाक्टर ने केजीएमयू में भर्ती कराने का परामर्श दिया था।
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