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धर्मांतरण प्रकरण: KGMU कार्यपरिषद का बड़ा फैसला, 13 डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए अनुशासनात्मक कमेटी गठित

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​लखनऊ। धर्मांतरण और डॉ. रमीज प्रकरण में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) की कार्यपरिषद ने शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। एसटीएफ (STF) की रिपोर्ट के आधार पर मामले में शामिल 13 डॉक्टरों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए एक विशेष अनुशासनात्मक समिति (Disciplinary Action Committee) गठित करने का फैसला किया गया है।
​कुलपति की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
​शुक्रवार को कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में KGMU कार्यपरिषद की बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान 30 अक्टूबर 2026 को एसटीएफ द्वारा भेजी गई रिपोर्ट पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
​बैठक की शुरुआत में कुलसचिव ने एसटीएफ की पूरी रिपोर्ट को बिंदुवार कार्यपरिषद के समक्ष रखा और उसका विस्तृत वाचन किया। इस दौरान प्रकरण से जुड़े KGMU के फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत प्रत्यावेदनों पर भी चर्चा की गई तथा परिषद के सदस्यों ने अपने-अपने सुझाव दिए।

​कमेटी का ढांचा: रिटायर्ड IPS अधिकारियों को मिलेगी प्राथमिकता
​KGMU एक्ट और परिनियमावली (Statutes) के प्रावधानों के तहत गठित होने वाली इस अनुशासनात्मक समिति में कुल 6 सदस्य होंगे:
​पदेन सदस्य: कुलपति और कुलसचिव।
​विश्वविद्यालय प्रतिनिधि: KGMU के 2 वर्तमान वरिष्ठ शिक्षक (श्रेणीवार नामित)।
​स्वतंत्र सदस्य: 2 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी।
​निर्णय लिया गया है कि स्वतंत्र सदस्यों के रूप में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
​विभागीय समितियां भी करेंगी प्रत्यावेदनों का परीक्षण
​कार्यपरिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों और फैकल्टी सदस्यों द्वारा दिए गए प्रत्यावेदनों को संबंधित विभागीय समितियों के समक्ष भेजा जाएगा। वहां सभी तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर परीक्षण किया जाएगा, जिसके बाद नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। शासन की ओर से भी विश्वविद्यालय को एक्ट व परिनियमावली के अनुरूप ही कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

​जांच और आगे का रास्ता
​नवनिर्मित अनुशासनात्मक समिति एसटीएफ की पूरी रिपोर्ट, संबंधित दस्तावेजों और साक्ष्यों का गहन परीक्षण करेगी। इसके साथ ही आरोपी डॉक्टरों व कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। समिति की संस्तुतियों के आधार पर विश्वविद्यालय की नियमावली के तहत अंतिम institutional कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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