लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के प्रोफेसर सोमा कौशिक सभागार में शनिवार को अंग प्रत्यारोपण और एनेस्थीसिया पर एक दिवसीय विशेष सीएमई (कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लिवर, किडनी और हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर प्रक्रियाओं में एनेस्थीसिया चिकित्सकों की भूमिका और नई तकनीकों पर विचार-विमर्श करना था।
कोमा की स्थिति में परिजनों की जागरूकता पर जोर
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब मरीज कोमा की स्थिति में पहुँचने लगते हैं, तो उनके परिजनों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। परिजनों के समय पर सहयोग और सूझबूझ से एनेस्थीसिया के चिकित्सक अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। संस्थान ने यह भी घोषणा की है कि अब एसजीपीजीआई में हर साल इस तरह की सीएमई आयोजित की जाएगी, जिससे चिकित्सकों के बीच नई तकनीकों का आदान-प्रदान हो सके। इसका सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा और उनका इलाज कम खर्च तथा किफायती दवाओं के साथ संभव हो सकेगा।
जटिल मामलों में भी डॉक्टरों ने दिखाई असाधारण कुशलता
एसजीपीजीआई के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक बार फिर अपनी उत्कृष्टता का परिचय दिया है।
संस्थान में हिमोग्लोबिन का स्तर मात्र 5 होने, रक्तचाप (बीपी) नियंत्रित होने और सीरम क्रिएटिनिन बढ़ा होने जैसी गंभीर अवस्थाओं के बावजूद मरीजों की रीनल (किडनी) ट्रांसप्लांट से पहले और बाद में विशेष देखभाल सुनिश्चित की जाती है।
हाल ही में, एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों—डॉ. दिव्या श्रीवास्तव, डॉ. तपस सिंह, डॉ. तन्वी और डॉ. कीर्ति—ने अत्यधिक जटिल परिस्थितियों के बावजूद एक सफल रीनल ट्रांसप्लांट कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
सूझबूझ से पार पाई गईं शल्य क्रिया की कठिनाइयां
इस जटिल मामले में 22 वर्षीय एक मरीज को दौरे (दिमाग में झटके) आने लगे थे और उसका मुंह सूज गया था। सर्जरी के दौरान मरीज के गले में पहले से फिचुला बना हुआ था, जिसके कारण गले के हिस्से का उपयोग करना संभव नहीं था।
ऐसी चुनौतीभरी स्थिति में एनेस्थेटिस्ट ने जांघ के बगल से नया फिचुला तैयार किया और शरीर के उस हिस्से को सुन्न (एनेस्थीसिया देकर) करके ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। इस अद्भुत चिकित्सकीय समन्वय ने यह साबित कर दिया कि विषम परिस्थितियों में भी सही तकनीक और सूझबूझ से जीवन बचाया जा सकता है।
देश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति और आयोजन समिति
कार्यक्रम में बताया गया कि वर्तमान में देश में डीएम एनेस्थीसिया के विशेषज्ञ सीमित संख्या में हैं, जिनमें से 4 फेलोशिप केवल एसजीपीजीआई से ही आते हैं, जो संस्थान की उत्कृष्टता को दर्शाता है।
इस सफल आयोजन में प्रमुख संकाय सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई:
आयोजन अध्यक्ष: डॉ. संजय धीराज और डॉ. संदीप साहू
आयोजन सचिव: डॉ. दिव्या श्रीवास्तव












