आक्रोशित नर्सों ने छलनी से दिखाई अपनी मांगे
शासनादेश में देरी पर भड़का नर्सिंग संवर्ग
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कहे जाने वाले नर्सिंग संवर्ग का रोष लगातार बढ़ता जा रहा है। शासन स्तर पर सहमति बनने के बावजूद शासनादेश जारी न होने के विरोध में राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर चल रहा दो घंटे का कार्य बहिष्कार गुरुवार को 21वें दिन भी जारी रहा।
खास बात यह है कि करवा चौथ का कठिन व्रत होने के बावजूद प्रदेशभर की महिला नर्सों ने हकों के लिए अडिग रहते हुए अस्पतालों में कामकाज ठप रखा और विरोध प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
वार्ता के बाद भी शासनादेश में टालमटोल से आक्रोश
संघ के नेतृत्व में गत 9 अक्टूबर से प्रदेश के सभी जनपदों के सरकारी चिकित्सालयों और राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सुबह के समय दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जा रहा है। नर्सेस संघ का स्पष्ट कहना है कि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अमित घोष के साथ हुई बैठकों में उनकी मांगों पर पूर्ण सहमति बन चुकी है। इसके बावजूद संबंधित शासनादेश जारी करने में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है, जिससे संवर्ग में भारी निराशा और आक्रोश है। संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शासनादेश निर्गत नहीं किया गया, तो इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर नर्सिंग कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
प्रमुख 13 सूत्रीय मांगें, जिन पर टिकी है नजर
प्रदर्शनी के दौरान संघ ने अपनी प्रमुख लंबित मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया। संघ की मुख्य मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
स्थानांतरण नीति: नर्सेस के लिए गृह जनपद में तैनाती और पारदर्शी स्थानांतरण की व्यवस्था लागू की जाए।
समयबद्ध पदोन्नति: निदेशालय से लेकर चिकित्सालय स्तर तक नर्सिंग संवर्ग के सभी रिक्त पदों पर बिना देरी पदोन्नति सुनिश्चित हो।
क्रेच सुविधा: अस्पतालों में कार्यरत महिला व पुरुष कर्मचारियों के बच्चों की देखभाल के लिए पालनाघर (क्रेच) बनाए जाएं।
सवेतन उच्च शिक्षा: बीएससी नर्सिंग की भांति अन्य उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी नर्सिंग संवर्ग को सवेतन अवकाश का लाभ मिले।
समायोजन सुरक्षा: जिला चिकित्सालयों के मेडिकल कॉलेज में उच्चीकृत होने पर वहां कार्यरत नर्सेस को उसी संस्थान में समायोजित किया जाए या पूर्व व्यवस्था में सुरक्षित रखा जाए।
भत्तों का पुनरीक्षण: उच्च संस्थानों की तर्ज पर नर्सिंग संवर्ग को भी समान एवं उचित भत्ते प्रदान किए जाएं।
चिकित्सा शिक्षा विभाग में पदोन्नति: नर्सिंग प्रशासन के वरिष्ठ पदों सहित सभी रिक्त उच्च पदों पर तत्काल चयन प्रक्रिया पूरी हो।
एसीपी (ACP) का लाभ: पात्र नर्सिंग अधिकारियों को बिना किसी अनावश्यक बाधा के समयबद्ध तरीके से एसीपी का लाभ मिले।
राजकीय नर्सेस संघ ने शासन से अपील की है कि उच्च स्तर पर बनी सहमतियों का सम्मान करते हुए तुरंत शासनादेश जारी किया जाए। संघ ने संकल्प दोहराया है कि जब तक मांगों पर ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह संघर्ष और विरोध प्रदर्शन इसी प्रकार जारी रहेगा।












