सुहागिनों का महापर्व: करवा चौथ आज, जानिए विधि-विधान से पूजा और व्रत खोलने के नियम

0
64

​लखनऊ। अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में प्रेम की प्रगाढ़ता का प्रतीक करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस पावन दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल (स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ) के अनुसार, करवा चौथ का व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण का जीवंत प्रतीक है।

​आइए जानते हैं करवा चौथ की सरल पूजा विधि, कथा और व्रत खोलने के संपूर्ण नियम:
​1. प्रातः काल की दिनचर्या और संकल्प
​ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या नए वस्त्र पहनकर पूर्ण सोलह श्रृंगार करें।
​मंत्र स्मरण: भगवान श्रीगणेश का ध्यान करते हुए “ॐ गणेशाय नमः”, भगवान शिव के लिए “ॐ नमः शिवाय” और माता पार्वती के लिए “ॐ शिवायै नमः” मंत्र का जप करें।
​सरगी ग्रहण: सूर्योदय से पूर्व सास द्वारा दी गई सरगी का सेवन करें और दिनभर निर्जला (बिना जल के) व्रत रखने का संकल्प लें।
​2. संध्या कालीन पूजा और विधि
​चौकी सजाएं: संध्या के समय घर के पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।
​मूर्ति स्थापना: इस आसन पर पीली मिट्टी से मां गौरी और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाएं या उनकी तस्वीर स्थापित करें।
​माता को अर्पित करें श्रृंगार: माता पार्वती को सोलह श्रृंगार, सुहाग की वस्तुएं और चुनरी अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश, शिव और पार्वती की विधिवत पूजा व आरती करें।
​करवा पूजन: करवा माता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। मिट्टी के करवे (कलश) पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। करवे के अंदर जल, थोड़े गेहूं और शकर भरकर रखें।

​सामग्रियां अर्पित करें: करवे को रोली, अक्षत, धूप, दीप, फूल, मिठाई, वस्त्र और दक्षिणा अर्पित करें।
​कथा श्रवण: हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर करवा चौथ की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में आरती करें। कथा संपन्न होने के बाद अक्षत माता के चरणों में अर्पित कर दें।
​3. चंद्रोदय दर्शन और व्रत पारण (व्रत खोलने) की विधि
​चंद्रमा को अर्घ्य: रात्रि के समय चांद निकलने के बाद छत या किसी खुले स्थान पर जाएं। चलनी (छलनी) में जलता हुआ दीपक रखकर सबसे पहले चंद्र देव के दर्शन करें और उन्हें अर्घ्य दें।

​पति का दर्शन: छलनी की ओट से ही अपने पति का चेहरा देखें।
​व्रत का पारण: पति के हाथों से जल ग्रहण करें और कुछ मीठा खाकर अपना कठिन निर्जला व्रत खोलें।
​बड़ों का आशीर्वाद: व्रत खोलने के पश्चात घर के बड़ों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
​विशेष संदेश: मान्यता है कि मिट्टी के करवे से चंद्र अर्घ्य देने से पति की लंबी आयु की मनोकामना पूर्ण होती है, वहीं माता पार्वती की सच्ची श्रद्धा से आराधना करने पर दांपत्य जीवन में सदैव सुख, शांति और मधुरता बनी रहती है।

Previous articleKgmu :विशेषज्ञों ने तीन साल के मासूम के जबड़े से निकाला 9×8.5 सेमी का दुर्लभ ट्यूमर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here