जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
लखनऊ। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना के साथ ही महाअष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन का अत्यंत विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के अंतिम दिनों में नन्हीं कन्याओं को देवी का साक्षात स्वरूप मानकर उनका आदर-सत्कार, पूजन और भोजन कराया जाता है। हालांकि, इस बार नवरात्रि की तिथियों के उतार-चढ़ाव के कारण श्रद्धालुओं में कन्या पूजन की तिथियों को लेकर थोड़ा भ्रम बना हुआ था, जिसे ज्योतिषशास्त्रियों ने पंचांग गणना के अनुसार स्पष्ट कर दिया है।

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पंचांग अनुसार कन्या पूजन और तिथियों का सटीक समय
स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज के ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल ने काशी पंचांग के हवाले से तिथियों का स्पष्ट गणित बताया है:
महाअष्टमी कन्या पूजन (18 अक्टूबर):
आश्विन शुक्ल पक्ष की महाअष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को प्रातःकाल 05:54 बजे से शुरू होकर पूरी दिन-रात रहती हुई 19 अक्टूबर की प्रातः 06:53 बजे तक रहेगी। अतः जो श्रद्धालु महाअष्टमी का कन्या पूजन करते हैं, वे 18 अक्टूबर को पूरे दिन पूजन कर सकते हैं।
महानवमी कन्या पूजन (19 और 20 अक्टूबर):
महानवमी तिथि 19 अक्टूबर को प्रातः 06:53 बजे से प्रारंभ होगी और 20 अक्टूबर को प्रातः 09:34 बजे तक रहेगी। इसलिए नवमी का कन्या पूजन 19 अक्टूबर को दिनभर और 20 अक्टूबर को प्रातः 09:34 बजे तक किया जा सकेगा।
दशमी, विसर्जन एवं विजयदशमी (20 अक्टूबर):
20 अक्टूबर को प्रातः 09:34 बजे के बाद दशमी तिथि लग जाएगी। इसी दिन सुबह 09:34 बजे के बाद व्रत का पारण, मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन और विजयदशमी (दशहरा) का महापर्व मनाया जाएगा।
शास्त्रीय विधि और कन्या पूजन का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को देवी का साक्षात स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि कन्या पूजन के बिना नवरात्रि का अनुष्ठान पूर्ण नहीं माना जाता। यह पर्व धार्मिक भक्ति के साथ-साथ समाज में नारी शक्ति के सम्मान का संकल्प भी दिलाता है।
पूजन विधि:
परंपरा के अनुसार, नौ कन्याओं को मां नवदुर्गा का प्रतीक मानकर और उनके साथ एक छोटे बालक को भैरव बाबा का स्वरूप मानकर आमंत्रित किया जाता है। श्रद्धालुओं को सर्वप्रथम कन्याओं के चरण पखारने (धोने) चाहिए, तत्पश्चात उन्हें तिलक लगाकर चुनरी ओढ़ानी चाहिए। इसके बाद हलवा, पूरी और काले चने का मुख्य प्रसाद खिलाकर फल एवं दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस शास्त्रीय विधि से कन्या पूजन करने पर मां भगवती अत्यंत प्रसन्न होती हैं। इससे घर-परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य की समृद्धि और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।











