लखनऊ। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि के पावन अवसर पर 19 सितंबर को श्री राधा अष्टमी और 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का शुभारंभ एक साथ हो रहा है। ब्रजमंडल सहित देशभर में इस दिन को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज (लखनऊ) के ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को अभिजीत मुहूर्त एवं अनुराधा नक्षत्र में श्री राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। इस वर्ष अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 1:00 बजे से प्रारंभ होकर 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के मान के अनुसार राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा।
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श्री राधा अष्टमी: जन्माष्टमी व्रत की पूर्णता और अखंड सौभाग्य का पर्व
जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद आने वाला यह व्रत धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
व्रत का महत्व: मान्यता है कि राधा रानी के बिना भगवान श्री कृष्ण की आराधना अधूरी मानी जाती है। जो श्रद्धालु राधा अष्टमी का व्रत रख विधि-विधान से राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं, उन्हें जन्माष्टमी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
सुख-समृद्धि और संतान सुख: इस व्रत को करने से घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती। सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
पूजन मुहूर्त: 19 सितंबर को मध्याह्न काल में सुबह 10:47 बजे से दोपहर 1:13 बजे तक पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त है।
विहित कर्म: इस दिन राधा-कृष्ण के पूजन के साथ-साथ स्त्रियों को भोजन कराना और ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक दान-दक्षिणा देना शुभ माना गया है।
16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का हुआ आगाज
भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से ही 16 दिनों तक चलने वाले विशेष ‘महालक्ष्मी व्रत’ की शुरुआत हो रही है।
व्रत की अवधि: यह व्रत 19 सितंबर से प्रारंभ होकर 3 अक्टूबर (आश्विन कृष्ण अष्टमी) को उद्यापन के साथ संपन्न होगा।
पूजा का समय: इन 16 दिनों तक प्रतिदिन सुबह और शाम मां महालक्ष्मी का पूजन किया जाता है। शाम के समय यानी प्रदोष काल में की गई पूजा को सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यता: यह व्रत मां लक्ष्मी की विशेष कृपा, जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है।












