kgmu: बाहर से दवा व लेंस मंगाने पर विभागाध्यक्ष से छीना प्रो-वीसी का पद

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​क्वीनमेरी की डॉ. अंजू अग्रवाल बनीं नई प्रतिकुलपति

​लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के नेत्र रोग विभाग में मरीजों को बाहर से लेंस और दवाएं लिखे जाने के बहुचर्चित मामले में प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। चार सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद जहां आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया था, वहीं विभागीय व्यवस्थाएं बनाए रखने में नाकाम रहने पर विभागाध्यक्ष को भी प्रतिकुलपति (प्रो-वीसी) के पद से हटा दिया गया है।

​जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभागाध्यक्ष से प्रो-वीसी का अतिरिक्त प्रभार वापस लेने का कड़ा फैसला लिया है।
​ओटी इंचार्ज समेत कर्मचारियों को थमाया गया नोटिस
​प्रशासनिक स्तर पर हुई जांच में पाया गया कि नेत्र रोग विभाग में लंबे समय से मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं और लेंस खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

इस पर संज्ञान लेते हुए केजीएमयू प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
​विभाग की खामियों और लापरवाही के सिलसिले में:
​मुख्य आरोपी डॉक्टर: जांच कमेटी की सिफारिश पर पहले ही निलंबित।
​कर्मचारी व ओटी इंचार्ज: विभागीय व्यवस्था में सेंधमारी और अनदेखी के चलते कारण बताओ नोटिस जारी।
​विभागाध्यक्ष: प्रशासनिक ढिलाई और निगरानी में चूक की जवाबदेही तय करते हुए प्रो-वीसी पद से मुक्त।

​क्वीनमेरी की डॉ. अंजू अग्रवाल बनीं नई प्रतिकुलपति
​मामले की गंभीरता को देखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने नए प्रो-वीसी के नाम का ऐलान कर दिया है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीनमेरी) की अध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल को विश्वविद्यालय का नया प्रतिकुलपति नियुक्त किया गया है।
​मरीजों को बेहतर और सस्ता इलाज प्राथमिकता: कुलपति
​केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय में मरीजों के हितों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​”मरीजों को बेहतर, पारदर्शी और किफायती इलाज मुहैया कराना हमारी पहली प्राथमिकता है। जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे, इसी मंशा के तहत नेत्र रोग विभाग की अध्यक्ष को प्रतिकुलपति पद से अलग करने का फैसला लिया गया है।
— डॉ. सोनिया नित्यानंद, कुलपति (केजीएमयू)
​प्रशासन के इस कड़े कदम से विश्वविद्यालय के अन्य विभागों में भी हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से केजीएमयू में मरीजों से बाहर की दवाएं मंगाने के धंधे पर लगाम लगेगी।

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