लोकबंधु अस्पताल के ‘आशा ज्योति केंद्र’ में आग, मची अफरा-तफरी

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​लखनऊ। आशियाना स्थित लोकबंधु अस्पताल परिसर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। शुक्रवार तड़के परिसर में संचालित ‘आशा ज्योति केंद्र’ के भवन में अचानक भीषण आग लग गई। सुबह करीब 5 बजे हुई इस घटना से पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि कर्मचारियों की सूझबूझ और फायर ब्रिगेड की तत्परता से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया।

​⚡ शॉर्ट सर्किट से भड़की आग, धुएं से घुटने लगा दम
​शुरुआती जानकारी के मुताबिक, सुबह लगभग 5 बजे आशा ज्योति केंद्र के वेटिंग एरिया में शॉर्ट सर्किट हुआ। इसके बाद फॉल सीलिंग ने तेजी से आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग की लपटें खिड़कियों से बाहर आने लगीं और पूरी बिल्डिंग में काला धुआं भर गया।

​कर्मचारियों ने दिखाया साहस: धुआं भरने के कारण सुरक्षाकर्मियों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कर्मचारियों ने तुरंत फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्रों) की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की।
​फायर ब्रिगेड की एंट्री: सूचना मिलते ही फायर डिपार्टमेंट की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह बुझाया जा सका।

​इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को एक बार फिर उजागर कर दिया है। लोकबंधु अस्पताल में आग लगने का यह पहला मामला नहीं है। ठीक एक साल पहले हुए खौफनाक हादसे से भी कोई सबक नहीं लिया गया।
​14 अप्रैल 2025 का वो काला दिन:
पिछले साल अस्पताल के दूसरे तल पर स्थित ICU और वार्ड में भीषण आग लगी थी। उस हादसे में करोड़ों के उपकरण और दस्तावेज़ जलकर खाक हो गए थे। करीब 200 मरीजों को आधी रात को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करना पड़ा था और एक व्यक्ति की जान भी चली गई थी।

​🛑 3 करोड़ का बजट, 1 साल का वक्त… फिर भी काम अधूरा!
​पिछले हादसे के बाद अस्पताल को सुरक्षित करने के लिए ₹3 करोड़ का बजट पास हुआ था। इसके तहत अस्पताल में:
​फायर-प्रूफ फॉल सीलिंग लगाई जानी थी।
​ऑटोमैटिक वॉटर स्प्रिंकलर (पानी की बौछार करने वाला सिस्टम) इंस्टॉल होना था।

​हकीकत क्या है? एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी यह काम आज तक अधूरा है। इसी कछुआ गति के कारण आज फिर एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। अधूरा काम होने की वजह से अस्पताल में हर दिन मरीजों और तीमारदारों की जान जोखिम में बनी हुई है।
​इस ताजा घटना के बाद आशा ज्योति केंद्र प्रशासन ने उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है।

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