
लखनऊ । महा शिवरात्रि 15 फरवरी को प्रत्येक वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है।
स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र अलीगंज के ज्योतिषाचार्य एस.एस.नागपाल ने बताया कि फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को सांयकाल 05:04 पर प्रारम्भ होगी और चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी को सांयकाल 05:34 पर समाप्त होगी। महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी रविवार को मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि को बनेंगे शुभ योग- प्रात: 06 :43 से प्रारम्भ होकर सांयकाल 07:48 तक सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा। उत्तराषाढा नक्षत्र सांयकाल 7:48 तक रहेगा ।
उसके उपरान्त श्रवण नक्षत्र का प्रारम्भ होगा, जो अगले दिन 16 फरवरी को सांयकाल 8:47 तक रहेगा, श्रवण नक्षत्र में किया गया शिव पूजन अत्यंत फलदायी होता है अभिजीत मुहूर्त दिन में 12: 48 से 12:53 तक रहेगा। अमृतकाल दिन 12:59 से दिन में 02:41 तक रहेगा।
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए जल, दूध, दही, घी, शहद और गन्ने के रस से अभिषेक करना शुभ होता है। मुख्य रूप से बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, शमी के पत्ते, भांग, सफ़ेद चंदन, भस्म और अक्षत अर्पित करें। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप, रुद्राभिषेक, और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना चाहिए। शिव पुराण, शिव चालीसा, और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। रात के चारों प्रहरों में बेलपत्र के साथ पूजा करना अत्यंत पुण्यकारी है।
इस बार महाशिवरात्रि पर कुंभ राशि में सूर्य, शुक्र, बुध, राहु का युति संबंध रहेगा, चन्द्रमा मकर राशि में उच्च के मंगल के साथ लक्ष्मी योग बनाएंगे जो शुभ फलदायी माना जा रहा है। इस योग में भगवान शिव की पूजा शीघ्र फल प्रदान करने वाली मानी गई है। महाशिवरात्रि 4 प्रहर पूजा मुहूर्त (15 फरवरी सांयकाल से 16 फरवरी प्रात: तक )
प्रथम प्रहर पूजा समय – सांयकाल 05 :58 से 09:09, द्वितीय प्रहर पूजा समय -रात्रि 09:09 से 12:20
तृतीय प्रहर पूजा समय – रात्रि 12:20 से प्रात: 03:31, चतुर्थ प्रहर पूजा समय – प्रात: 03:31 से 06 :42
महाशिव रात्रि पर शिव अराधना से प्रत्येक क्षेत्र में विजय, रोग मुक्ति, अकाल मृत्यु से मुक्ति, गृहस्थ जीवन सुखमय, धन की प्राप्ति, विवाह बाधा निवारण, संतान सुख, शत्रु नाश, मोक्ष प्राप्ति और सभी मनोरथ पूर्ण होते ह्रै कुंडली में अशुभ ग्रह शान्त होते है। महाशिवरात्रि कालसर्पदोष, पितृदोष शान्ति का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। जिन व्यक्तियों को कालसर्पदोष है उन्हें 8 और 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लाभ मिलता है ।











