प्रधान संपादक बृजेश मिश्रा के प्रेरक संवाद, दावोस से लखनऊ तक विचारों की गूंज

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लखनऊ। स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित विश्व प्रसिद्ध वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से लौटकर जब भारत समाचार के प्रधान संपादक बृजेश मिश्रा लखनऊ पहुंचे, तो उनका स्वागत केवल एक औपचारिक आयोजन भर नहीं रहा, बल्कि यह विचारों, अनुभवों और वैश्विक दृष्टि के सम्मान का जीवंत प्रतीक बन गया। यह कार्यक्रम इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) द्वारा आयोजित किया गया, जिसके सफल और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए IFWJ के पदाधिकारियों हेमंत तिवारी एवं सिद्धार्थ कलहंस विशेष रूप से बधाई के पात्र हैं।
इस कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय विशेषता रही बृजेश मिश्रा की संवाद शैली, जो सरल होने के साथ-साथ अत्यंत स्पष्ट, तथ्यपरक और दूरदर्शी थी। उद्यमियों और पत्रकारों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उन्होंने जिस आत्मीयता, सहजता और गहराई से उत्तर दिया, उन्होंने उपस्थित सभी श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
दावोस को लेकर उन्होंने कई महत्वपूर्ण और रोचक तथ्य साझा किए।

उन्होंने बताया कि दावोस कोई भव्य महानगर नहीं, बल्कि एक छोटा-सा शांत गांव है, जहां 21 जनवरी के बाद दुनिया के कई देशों की बड़ी कंपनियों के सीईओ, वैश्विक निवेशक और विभिन्न देशों व राज्यों के मंत्री एक ही सड़क पर बिना किसी भेदभाव के खुले मन से संवाद करते दिखाई देते हैं। य
रोजगार, निवेश और नीतिगत सुधारों पर दावोस में व्यापक मंथन होता है। इस संदर्भ में मिश्रा जी की एक पंक्ति विशेष रूप से प्रेरक रही।
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री स्वयं टेबल-टू-टेबल जाकर निवेशकों से संवाद कर रहे थे।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एआई का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके निर्माता भी इसके दीर्घकालिक प्रभावों को पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं। ऐसे समय में भारत के लिए यह अवसर है कि वह अपनी कार्य-पद्धतियों में बदलाव करे और तकनीकी नेतृत्व की भूमिका निभाए। दावोस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भूमिका को उन्होंने विशेष रूप से सराहनीय बताया।

विशेष रूप से इन्वेस्ट यूपी की नीतियों को दावोस में मिली सराहना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने अपनी एक मजबूत वैश्विक पहचान बनाई है, जिसे अब और अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रमोट करने की आवश्यकता है।
समग्र रूप से देखें तो बृजेश मिश्र के स्वागत समारोह में साझा किए गए अनुभव नीति-निर्माताओं, उद्यमियों और पत्रकारों सभी के लिए मार्गदर्शक, संदेशप्रद और ज्ञानवर्धक सिद्ध हुए।

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