क्रिटकल केयर में एनेस्थीसिया की भूमिका महत्वपूर्ण

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एस क्राफ्ट- 2026

लखनऊ । पी जी आई एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में एनेस्थीसिया विभाग द्वारा शानिवार एवं रविवार को एकअल्ट्रासाउंड-गाइडेड रीजनल एनेस्थीसिया पर दो दिवसीय सीएमई एवं कार्यशाला एस-क्राफ्ट 26 का सफल आयोजन किया गया, जिसमें एनेस्थीसिया समुदाय की उत्साही भागीदारी देखी गई। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। लगभग 20 अनुभवी संकाय सदस्यों के सक्षम नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए अत्यंत संवादात्मक व ज्ञानवर्धक रहा।

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पीजीआई के एनेस्थेसियोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय धीराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस दो दिवसीय सीएमई सह कार्यशाला का दूसरा संस्करण संपन्न हुआ। एनेस्थीसिया विभाग के संकाय सदस्यों से बनी आयोजन टीम का नेतृत्व आयोजन सचिव डॉ. प्रतीक सिंह बैस ने किया। उद्घाटन के दौरान संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने रोगी देखभाल और सुरक्षा में सुधार लाने वाली अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनों के उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला और इसके लिए एनेस्थेसियोलॉजी विभाग को बधाई दी।

संस्थान के डीन प्रो. शालीन कुमार ने भी दर्द कम करने और रिकवरी समय को घटाने में सहायक पेरिऑपरेटिव नर्व ब्लॉक के महत्व को दोहराया। प्रो. संजय धीराज ने बताया कि कैसे ये नर्व ब्लॉक तनाव प्रतिक्रिया को कम कर रहे हैं और शीघ्र चलने-फिरने में भी मदद कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अल्ट्रासाउंड स्नातकोत्तर छात्रों को नवीनतम तकनीकें सीखने में मदद कर रहा है और यह कार्यक्रम सभी उपस्थित लोगों के बीच ज्ञान का प्रसार करने में सहायक होगा।

संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता ने शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए विभाग के सभी प्रयासों में अपना समर्थन देने का आश्वासन दिया। एटीसी के एनेस्थीसिया टीम के डॉ. वंश, प्रतीक, सुरुचि, गणपत और रफत द्वारा लिखित अल्ट्रासाउंड निर्देशित क्षेत्रीय एनेस्थीसिया के लिए एक बेडसाइड संदर्भ एटलस का विमोचन किया गया। एटीसी के प्रमुख प्रो .अरुण श्रीवास्तव ने इतने सुव्यवस्थित कार्यक्रम और पुस्तक विमोचन के लिए पूरी टीम को बधाई दी।

उद्घाटन समारोह का समापन आयोजन सचिव डॉ. प्रतीक द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। यह दो दिवसीय कार्यशाला अल्ट्रासाउंड -निर्देशित रीजनल एनेस्थीसिया में ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को बढ़ाने पर केंद्रित थी, जो आधुनिक एनेस्थेटिक अभ्यास का एक अभिन्न अंग बन चुका है।

देश भर के प्रतिष्ठित शिक्षकों ने रीजनल एनेस्थीसिया में अल्ट्रासाउंड की नवीनतम प्रगति, तकनीकों, सुरक्षा पहलुओं और नैदानिक ​​अनुप्रयोगों पर अपने विचार साझा किए। इस सीएमई का समापन प्रतिभागियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ हुआ, जिन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता, सुव्यवस्थित योजना और इस विषय के विशेषज्ञों से सीखने के अवसर की प्रशंसा की।

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