ओटी पर्सनल की एक चूक से 40% तक बढ़ सकता है, संक्रमण का खतरा

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एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में हुआ विशेष प्रशिक्षण

लखनऊ। यदि ऑपरेशन थिएटर में प्रोटोकॉल का सही पालन न हो, तो सर्जरी के बाद संक्रमण का खतरा 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, वहीं उपकरणों की गलत हैंडलिंग से हर चौथे मरीज में जटिलताएं सामने आ सकती हैं।

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विशेषज्ञों के अनुसार आपात स्थिति में प्रशिक्षित ओटी पर्सनल की कमी से प्रतिक्रिया समय 50 प्रतिशत तक धीमा हो जाता है, जो मरीज की जान के लिए घातक हो सकता है। इन्हीं जोखिमों को कम करने और सर्जिकल सेफ्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने ऑपरेटिंग रूम पर्सनल (ओआरपी) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार को आयोजित हुआ।
प्रशिक्षण के दौरान ऑपरेशन थिएटर प्रोटोकॉल, एसेप्सिस एवं स्टरलाइजेशन प्रक्रियाएं, सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स की सुरक्षित हैंडलिंग, मरीज की सही पोजिशनिंग, सर्जिकल वर्कफ्लो तथा आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया। इंटरएक्टिव सत्रों और प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और सहायक थिएटर कर्मियों की तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ किया गया।

कार्यक्रम का नेतृत्व ऑर्थोपेडिक्स विभाग के अध्यक्ष डॉ. पुलक शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि सर्जरी की सफलता केवल सर्जन की दक्षता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि ओटी पर्सनल की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। “ओटी पर्सनल सर्जरी के साइलेंट गार्डियन होते हैं। थिएटर की तैयारी, स्टरल माहौल बनाए रखना, सही समय पर सही उपकरण उपलब्ध कराना और मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी अहम जिम्मेदारी है,” उन्होंने कहा।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार मरीज की गलत पोजिशनिंग से नर्व इंजरी, प्रेशर सोर और लंबे समय तक दर्द की समस्या 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। वहीं नियमित और संरचित प्रशिक्षण से सर्जिकल एरर में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है और मरीज की रिकवरी भी तेज होती है।

कार्यक्रम में ऑपरेशन थिएटर स्टाफ, रेजिडेंट डॉक्टरों और फैकल्टी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। यह आयोजन न केवल एक शैक्षणिक पहल रहा, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि बेहतर सर्जरी केवल अच्छे डॉक्टर से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और सजग ओटी टीम से ही संभव है।

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