लखनऊ । इंटीग्रल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने दो माह की बालिका की जान बचाते हुए जीवनरक्षक हृदय उपचार को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। बच्ची को जटिल सायनोटिक जन्मजात हृदय रोग के कारण अत्यंत गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
बच्ची जन्म से ही गंभीर नीलापन (सायनोसिस) से पीड़ित थी। रोने के दौरान उसके होंठ, नाखून और शरीर का रंग नीला पड़ जाता था। परिजनों ने बताया कि जन्म के बाद से ही वे बच्ची के इलाज के लिए संघर्ष कर रहे थे और लखनऊ व दिल्ली के कई सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों से परामर्श लिया गया, लेकिन बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
28 जनवरी को बच्ची को इंटीग्रल हॉस्पिटल लाया गया, जहां उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी। उस समय बच्ची का ऑक्सीजन सैचुरेशन मात्र 23 प्रतिशत था। वह बेहद सुस्त थी, दूध नहीं पी पा रही थी और बार-बार उल्टी हो रही थी। तत्काल जांच के बाद पीडियाट्रिक कार्डियक टीम ने आपातकालीन डक्टल स्टेंटिंग प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
चिकित्सकीय जांच में बच्ची को पल्मोनरी एट्रेसिया विद टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट (TOF) पाया गया। फेफड़ों तक पर्याप्त रक्त प्रवाह बहाल करने के लिए दो डक्टल स्टेंट लगाए गए। उपचार के बाद बच्ची का ऑक्सीजन सैचुरेशन 23 प्रतिशत से बढ़कर 93 प्रतिशत हो गया और उसका रंग गहरे नीले से गुलाबी हो गया।
एनआईसीयू में निरंतर देखरेख के बाद बच्ची की हालत में लगातार सुधार हुआ और अब उसे स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जिससे परिवार को बड़ी राहत मिली है। बच्ची का रंग बदलते देख उसकी पांच वर्षीय बड़ी बहन खुशी से मुस्कुराते हुए बोली, “मुन्नी नीली से लाल हो गई।” बच्ची के पिता ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, “हमें लगभग उम्मीद छोड़नी पड़ गई थी, लेकिन इंटीग्रल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने हमारी बच्ची को नया जीवन दिया।
इंटीग्रल हॉस्पिटल ने पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी सेवाओं की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत बच्चों के लिए विशेष ओपीडी परामर्श एवं उन्नत हृदय उपचार उपलब्ध होंगे। इस अवसर पर इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के माननीय चांसलर प्रो. सय्यद वसीम अख्तर ने पूरी चिकित्सा टीम को बधाई दी और किफायती व उन्नत बाल हृदय चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।















