लखनऊ।संजय गांधी पीजीआई के चौथा रिसर्च शो केस( शोध दिवस) बुधवार को मनाया गया। शोध केस में दो सौ से अधिक शोध पत्र संकाय सदस्यों एवं छात्रों ने प्रस्तुत किया। निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि इनमें से 40 विशेष शोध को समिति द्वारा चुना गया। इन शोध वैज्ञानिकों से संस्थान के 40 वें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर सम्मानित किया जाएगा।
शोध को बढ़ावा देने के लिए इंट्रामुरल शोध का बजट पांच से दस लाख कर दिया गया इससे नए शोध वैज्ञानिकों को काफी रुचि बढ़ी है। स्थापना दिवस के मौके पर मुख्य वक्ता जन स्वास्थ्य सहयोग के सदस्य डा. रमन कटारिया होंगे। विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और राज्य मंत्री चिकित्सा शिक्षा मयंकेश्वर शरण सिंह होंगे। शोध दिवस पर अमरेकि से डा. शिखर मेहरोत्रा , सीडीआरआई के डा. अरूण त्रिवेदी और आईआईटी कानपुर के डा. संतोष कुमार मिश्रा ने व्य़ाख्यान दिया।
पीजीआई की हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. रूपाली खन्ना ने 45 से कम उम्र की महिलाओं में दिल की बीमारी की आशंका बढाने वाले कारण का पता लगाने में कामयाबी हासिल की है। शोध से साबित हुआ कि डायबटीज पर नियंत्रण और प्रोजेस्ट्राम हारमोन का नियंत्रित रख कर दिल की बीमारी से बचा जा सकता है।
पता लगेगा बुखार का कारण
लखनऊ।आटो इम्यूनो डिजीज एसएलई से ग्रस्त मरीजों में बुखार का कारण पता लगाना होगा संभव होगा। इस बीमारी से ग्रस्त मरीज इमरजेंसी में बुखार के साथ आते है बुखार का कारण बीमारी की सक्रियता या संक्रमण इसका पता लगाना जरूरी होता है तभी इलाज की सही दिशा तय होती है। कारण का पता जल्दी लगाने के लिए संजय गांधी पीजीआई के क्लीनिकल इम्यूनोलाजी विभाग के डा. किशन मजिठिया ने विभाग की प्रमुख प्रो. अमिता अग्रवाल के साथ 159 मरीजों पर शोध किया तो पाया कि बैक्टीरिया संक्रमण होने पर सीआरपी, टीएलसी, न्यूट्रोफिल एवं लिम्फोसाइट का अनुपात, सीडी64, सीडी 14 मार्कर बढ़ जाता है।
ठीक समय पर होता है प्रसव
पति पत्नी में ब्लड ग्रुप में भिन्नता के कारण गर्भस्थ शिशु में एनीमिया की आशंका बढ़ जाती है। एसे दंपित के गर्भस्थ शिशु का जीवन बचाने के लिए गर्भ में रक्त चढाया जाता है जिसे इंट्रा यूट्राइन बल्ड ट्रांसफ्यूनजन कहते हैं। अभी तक माना जाता रहा है कि एंटी डी एंटीबाडी की उच्च संद्राता वाले महिलाओं में आईयूटी के बाद भी जल्दी प्रसव कराना पड़ता है लेकिन संजय गांधी पीजीआई के ट्रांसफ्यूनजन मेडिसिन की डा. वंसुधरा सिंह,डा.धीरज खेतान, डा. प्रशांत अग्रवाल ने साबित किया है कि एंटी डी की संद्रता अदिक होने पर भी प्रसव समय से होता है। समय से पहले प्रसव की जरूरत नहीं है।
स्टेरायड नहीं करेगा नुकसान – प्रो. जिया हाशिम
फेफड़े के संक्रमण, सूक्ष्म रक्त वाहिका में रूकावट (वेस्कुलाइटिस) , सीओपीडी( क्रानिक आब्सट्रेक्सन पल्मोनरी डिजीज) सहित कई बीमारी में स्टेरायड ( इम्यूनो सप्रेसिव) देना पड़ता है। हाई डोज डेक्सामेथासोन अक्सर दिया जाता है हमने देखा कि इससे फंगल संक्रमण की आशंका बढ़ जाता है। संजय गांधी पीजीआई के पल्मोनरी मेडिसिन के प्रो. जिया हाशिम ने शोध में पाया कि कम मात्रा में डेक्सामेथासोन की जगह वाइसोलोन, मिथाइन प्रिडलीसिलोन स्टेरायड देना चाहिए। सौ से अधिक मरीजों पर शोध किया है। इस शोध को विश्व स्तर पर स्वीकार किया गया है। शोध को रिसर्च शो केस में भी प्रस्तुत किया।