लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय डॉक्टरों का पलायन जारी है। इनमें विशेषज्ञ डॉ अरशद अहमद और डॉक्टर अंकुर कपूर से पहले भी काफी संख्या में विशेषज्ञ केजीएमयू छोड़कर जा चुके हैं। विशेषज्ञों के जाने से कई विभागों की है बंद होने की नौबत तक आ चुकी है। इनमें एंडोक्राइन विभाग प्रमुख रूप से है। केजीएमयू में चर्चा रहती है कि निजी क्षेत्र के अस्पताल लगातार यहां विशेषज्ञों के संपर्क में बने रहते हैं यह वह डाक्टर होते हैं । जो कि पहले छोड़ कर जा चुके होते हैं और यहां के डाक्टरों को लगातार महंगें- महंगे पैकेज का आफर दिया करते हैं। बताते चलें कुछ अरसा पहले राजधानी में खुले एक निजी अस्पताल मैं काफी संख्या में डॉक्टर छोड़कर जाने का मन बना चुके थे ,परंतु शासन के हस्तक्षेप के बाद यह प्रक्रिया कुछ कम हो गई।
इसके अलावा निजी अस्पतालों का मैनेजमेंट भी किसी ना किसी तरह विशेषज्ञ डॉक्टरों के संपर्क में रहता है और ज्वाइन करने का ऑफर दिया करता है। चर्चा इस बात की भी है बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनी भी विशेषज्ञ डॉक्टरों को पैकेज ऑफर देती रहती है कि आप वहां ज्वाइन करने पर इस तरह का पैकेज दिया जाएगा।
जबकि केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि यह डॉक्टर का निजी फैसला होता है वह कहां जाना चाहता है और कार्य करना चाहता है केजीएमयू में रिसर्च, एजुकेशन देने के साथ मरीजों को देखने की प्रक्रिया भी शामिल है।
के जीएमयू में करीब 500 डॉक्टर है। लगभग 100 पद खाली हैं। इनकी भर्ती प्रक्रिया की चल रही है। डॉक्टरों के जाने से संस्थान को बड़ा नुकसान होता है। इसकी भरपाई संभव नहीं है। गैस्ट्रो सर्जरी, जनरल सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, नेफ्रोलॉजी अहम विभाग हैं।
लगातार पलायन कर रहे डॉक्टर
-गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉक्टर संदीप वर्मा
-डॉ. साकेत, डॉ. विशाल, डॉ. प्रदीप जोशी
-नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. संत प्रसाद पांडेय
-न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. सुनील कुमार
-ट्रांसप्लांट यूनिट के डॉ. मनमीत सिंह
-सीवीटीएस विभाग के डॉ. विजयंत देव ने भी दिया इस्तीफा
-गठिया रोग विभाग के डॉ. अनुपम वाखलू
-एंडोक्राइन मेडिसिन विभाग के डॉ. मधुकर मित्तल भी जा चुके हैं
-इंडोक्राइन डॉ. मनीष गुच्छ
-आर्गेन ट्रांसप्लांट डॉ. विवेक गुप्ता