लखनऊ। किं ग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में एमडी और एमएस के साथ डिप्लोमा-सार्टिफिकेट कोर्स का नये पाठ¬क्रम का संचालन की तैयारी चल रही है, जब कि क्वीनमेरी में गायनी पाठ्यक्रम में एमडी के बजाए एमएस की डिग्री प्रदान की जाएगी। इससे पाठ¬क्रम का नाम बदल जाएगा।
बुधवार को केजीएमयू में फैकल्टी बोर्ड की बैठक में नये पाठ्यक्रम की चर्चा की गयी, इसके बाद पाठ¬क्रम को संस्तुति दे दी गयी। अभी क्वीनमेरी में पीजी करने वाली छात्राओं को एमडी की डिग्री दी जा रही है, जबकि विभाग में प्रसव, ट्यूमर व महिलाओं संबंधी अन्य जटिल बीमारियों का इलाज सर्जरी से किया जाता है। इसको देखते हुए अब एमडी की डिग्री के नाम में परिवर्तन किया जा रहा है। इसे एमएस में तब्दील करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे फैकल्टी बोर्ड से सस्तुति मिल गई है। अब इसे एकेडमिक काउंसिल में रखा जाएगा। इसके बाद आखिर में कार्य परिषद से हरी झंडी के लिए रखा जाएगा। स्त्री रोग विभाग में ऑब्सटेट्रिक क्रिटिकल केयर में पोस्ट डॉक्टोरल सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव पास किया गया। इसी तरह पीजी कोर्स में मेडिकल एजूकेशन, मेडिको लीगल और रिसर्च मेथडोलॉजी को शामिल के प्रस्ताव को भी संस्तुति मिली है।
नये प्रस्तावों के अनुसार पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक्स विभाग में प्लास्टर टेक्नीशियन का सर्टिफिकेट कोर्स के अलावा एमसीएच पाठ्यक्रम भी शुरू किया जा रहा है। पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक्स विभाग में फेलोशिप की सीट भी बढ़ेगी। पैथालॉजी विभाग में नेफ्रोयूरोपैथोलॉजी, एडवांस एंड क्लीनिकल पैथालॉजी, आंकोसर्जिकल पैथालॉजी, लैबोरेट्री मेडिसिन में पोस्ट डॉक्टोरल सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव बनाया गय। क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में इंडियन डिप्लोमा इन क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की सीट दो से बढ़ाकर चार करने के प्रस्ताव को अनुमति दे दी गयी ह। विभाग में इंडियन फेलोशिप क्रिटिकलकेयर मेडिसिन को पाठ्यक्रम का पार्ट बनाने का प्रस्ताव भी बोर्ड से मंजूरी के लिए रखा गया। फॉर्माकोलॉजी, एनीस्थीसिया और रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभाग में नये कोर्स और सीट बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखे गये।











