लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दंत संकाय के डॉ बालेन्द्र प्रताप सिंह और डॉ कमलेश्वर सिंह ने रिसर्च पेपर कम्पटीशन प्रतियोगिता 2021 का पहला और दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है।
प्रास्थोडॉन्टिक्स विभाग के डॉ. कमलेश्वर सिंह ने बताया कि नये शोध में अब हड्डी और उस पर दांत एक बार में प्रत्यारोपित किया जा सकेगा। यह पुरानी तकनीक से ज्यादा सफल है आैर इसके प्रयोग के बाद मरीज को केजीएमयू बार इलाज के लिए परिक्रमा नहीं करनी होगी। यह जानकारी केजीएमयू दंत संकाय के शोध में निकला है। इस शोध में केजीएमयू के प्रास्थोडॉन्टिक्स विभाग के तहत 60 मरीजों पर शोध हुआ है। भारतीय प्रॉस्थोडॉन्टिक्स सोसाइटी की तरफ से आयोजित शोध प्रतियोगिता में इसमें पहले और दूसरे पायदान पर केजीएमयू के डॉक्टरों ने कब्जा जमाया।
प्रास्थोडॉन्टिक्स विभाग के डॉ. कमलेश्वर सिंह ने बताया कि बहुत से मरीजों में मसूढ़े की हड्डी गल जाती है। इसके बाद मरीज का कम से तीन सर्जरी कर दांतों का प्रत्यारोपण किया जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग चार से पांच महीने का समय लग जाता है। इसके लिए मरीज को कई बार अस्पताल तक आना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अब शोध में निकली नयी तकनीक से मसूढ़े में हड्डी, स्कू और दांत एक साथ प्रत्यारोपित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में हड्डी को भी कम नुकसान पहुंचता है। खास बात यह है कि एक ही बार में दांत लग जाता है। इलाज की यह प्रक्रिया एक दिन में पूरी हो रही है।

केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह के मुताबिक दूसरा शोध पर पहला पुरस्कार डॉ. बालेंद्र और डॉ. शहिद को मिला है। डॉ शाहिद ए शाह और डॉ बालेन्द्र प्रताप सिंह ने प्लेटलेट रिच प्लाज्मा और अल्ट्रावायलेट रेज़ का डेंटल इम्प्लांट पर पड़ने वाले प्रभाव के जैविक और एस्थेटिक परिणाम” शोध पर एक लाख रुपये का पुरस्कार प्राप्त किया। डॉ. सुधीर सिंह के मुताबिक दांतों में जो इंप्लांट लगाए जाते हैं यदि उन्हें यूवी किरणों से गुजारने के बाद लगाया जाए तो हड्डी कम गलती है। इंप्लांट लगाने के एक साल तक दांत की हड्डी दो मिलीमीटर तक गलती है। इसे यूवी किरणों से गुजारने के बाद यह एक मिमी से भी कम गलती है। केजीएमयू में 80 मरीजों पर यह शोध किया गया था।











