लखनऊ । संजय गांधी पी जी आई के निदेशक प्रो आर के धीमान ने कहा है कि कोरोना के संक्रमण से ग्रसित होने के बाद मरीज में न ही ब्लैक फंगस होता है और न ही यलो फंगस होता है। इसमें सिर्फ व्हाइट फंगस होता है। व्हाइट फंगस में भी इम्यूनटी की कमी एवं कमजोरी की शिकायत होती है। कुछ लोगों में शरीर के अंदर फंगस की शिकायत होती है। इसकेे लक्षणों में आँखों में लाली पन, नाक से रिसाव या नाक से ब्लड निकलने की शिकायत हो सकती है। आँखों के नीचे धसने या दबा होता है। जब कि चिकित्सकों का अनुमान है कि ब्लैक फंगस और यलो फंगस एवं व्हाइट फंगस की तीनों में एक जैसे ही लक्षण होते हैं। जब कि पी जी आई के निदेशक प्रो आर के धीमान का कहना है कि सिर्फ व्हाइट फंगस ही होता है।
उन्होंने बताया व्हाइट फंगस हड्डियों को गला देता है। यह नमी से पनपता हैं। जिन लोगों में फंगस की शिकायत हो, उन्हें बासी भोजन को खाने से बिल्कुल परहेज करना चाहिए। व्हाइट फंगस शरीर के अंदरूनी अंगो पर हमला करता है। सुस्ती और कमजोरी लगातार वजन कम होने पर यह शुरूआती लक्षण दिखाई देने के बाद इलाज के लिए चिकित्सक के पास सम्पर्क करना चाहिए। जिन मरीजों में फंगस के लक्षण होते हैं । उन्हें मवाद रिसना , घाव सूखने में देरी, कुपोषण और भूख न लगना वजन कम होने पर यह शुरूआती लक्षण होते हैं।। इसके इलाज में इंजेक्शन एम्फोटेरीसन बी का प्रयोग होता है।















