लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की लापरवाही से डायलिसिस व्यवस्था बिगड़ रही है। प्रदेश सरकार ने जनवरी महीने के अंत तक डायलिसिस के सभी मशीनें शुरू करने के लिए कहा गया था। परन्तु सिर्फ छह मशीनों पर डायलिसिस हो रही है। इसके कारण एचआईवी पॉजीटिव, जटिल बीमारी तथा गरीब मरीजों की डायलिसिस समय पर नहीं हो पा रही है। शताब्दी अस्पताल में पीपीपी मॉडल के तहत डायलिसिस मशीन संचालन करने वाली कंपनी का आरोप है कि करीब दो करोड़ रुपया का भुगतान केजीएमयू नही कर रहा है। इस कारण खराब मशीनों की मरम्मत नहीं हो पा रही है।
केजीएमयू के शताब्दी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में पीपीपी माडल के तहत 17 मशीनें डायलिसिस की लगी हैं। इनमें डायलिसिस की पांच मशीनें मेडिसिन विभाग में लगी हैं, परन्तु यहां पर चार मशीनों पर ही मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। इन पर अन्य बीमारियों या अन्य कारणों से मरीज की डायलिसिस की जाती है, जबकि आठ डायलिसिस के उपकरण ट्रामा सेंटर के पल्मोनरी इमरजेंसी मेडिसिन में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए लगी है।
यह मशीनों तो विभागों में भर्ती मरीजों के अनुसार डायलिसिस करती है, परन्तु नेफ्रोलॉजी विभाग में लगी मशीनों पर विभिन्न जनपदों से आये मरीजों की डायलिसिस की जाती है। मरीजों की सुविधा व संक्रमण से बचाने के लिए एचआईवी मरीजों की डायलिसिस अलग की जाती है। इसके लिए छह मशीनें अलग है। यहां पर उदासीनता व लापरवाही के चलते करीब तीन माह से ये सभी मशीनें बंद हैं। इसी तरह 11 मशीनों में अब सिर्फ छह चल रही हैं।सबसे खराब स्थिति एचआईवी व अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों की हैं। यहां पर प्रतिदिन 20 से 25 मरीजों को डायलिसिस के लिए बुलाया जाता रहा है।
शताब्दी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में पीपीपी के तहत डायलिसिस मशीन चलाने वाली वाली कंपनी का कहना है कि उसका करीब दो करोड़ रुपया केजीएमयू पर बकाया चल रहा है। मशीनों की मरम्मत भी नहीं हो पा रहा है।
सीएमएस डा. एस एन शंखवार का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही भुगतान करा दिया जाएगा। कार्यदायी संस्था को बंद पड़ी मशीनों को मरम्मत के लिए कहा गया है।
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