लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन ने यूरोलॉजी विभाग के डा. मनमीत व नेफ्रोलॉजी विभाग के डा. संत कुमार पांडे का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। डा. पांडे के इस्तीफे के बाद नेफ्रोलॉजी में डायलिसस यूनिट के संचालन की दिक्कत बन सकती है। इसके अलावा किडनी प्रत्यारोपण यूनिट में विशेषज्ञ की कमी बन गयी है। यह दोनों डाक्टर गोमती नगर स्थित निजी अस्पताल में ज्वाइन करने जा रहे है।
केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग व किडनी प्रत्यारोपण यूनिट में तैनात डा. मनमीत के साथ ही नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डा. संत कुमार पांडे ने इस्तीफा देकर निजी अस्पताल ज्वाइंन करने की बात कही थी। केजीएमयू प्रशासन ने दोनों डाक्टरों को समझाते हुए इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया आैर इस्तीफा विचाराधीन कर दिया। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने डा. मनमीत को प्रत्यारोपण यूनिट से वापस उनके मूल विभाग यूरोलॉजी विभाग भेज दिया गया था। बताया जाता है कि दोनों डाक्टरों ने केजीएमयू प्रशासन की मानमनौव्वल को नहीं माना अौर इस्तीफा स्वीकार करने के लिए कह दिया। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने भी दोनों डाक्टरों के इस्तीफे स्वीकार कर लिया।
बताते चले कि नेफ्रोलॉजी विभाग में एक वरिष्ठ डाक्टर पहले ही इस्तीफा देकर जा चुका है। अब डा. संत कुमार पांडे के जाने के बाद नेफ्रोलॉजी विभाग के अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगा है। सबसे ज्यादा यहां पर पीपीपी मॉडल पर चलने वाली डायलिसिस यूनिट के संचालन पर संकट के बादल मडराने लगे है। हालांकि डायलिसिस यूनिट में मेडिसिन विभाग के डाक्टरों को पहले से जोड़ कर काम चलाने लगा है। उधर बताया जाता है कि इन दो विशेषज्ञ डाक्टरों के इस्तीफे स्वीकृत हो जाने के बाद कुछ अन्य विशेषज्ञ डाक्टर भी इस्तीफा देने पर विचार करने लगे है।
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