गजब : यहां आक्सीजन सिलेंडर की भी वेंटिग

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में ऑक्सीजन सिलेंडर आने वाले गंभीर मरीजों को जांच व वार्ड में शिफ्ट के दौरान नहीं मिल पा रहे है। गंभीर मरीजों को जाने के लिए सिलेंडर आने का इंतजार करना पड़ता है। लापरवाही यहां तक है छोटे आक्सीजन सिलेंडर की जांच पड़ताल तक नहीं की जाती है। ऐसे में मरीजो की जान पर अक्सर बन आती है।

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केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में लगभग करीब सौ से डेढ़ सौ मरीजों की रोजाना भर्ती होती है। इनमें ज्यादातर मरीज एक्सीडेंटल या अन्य बीमारियों व कारणों से गंभीर होते है। जिन्हें तत्काल ऑक्सीजन लगाकर ही इलाज शुरू किया जाता है। यहां पर इमरजेंसी में अक्सर बिस्तर कम पड़ जाते है आैर ऑक्सीजन प्वाइंट कम हो जाते हैं। ऐसी हालत एक ऑक्सीजन प्वाइंट से दो मरीजोंं को ऑक्सीजन दिया जा रहा था। काफी संख्या में मरीज ऐसे भी थे, जिन्हे ऑक्सीजन सिलेंडर न मिलने पर उन्हें शिफ्ट करने व जांच में देर हो जाती है। इमरजेंसी में ऑक्सीजन देने के लिए बारह प्वाइंट बने है।

यहां पर जांच कराने व शिफ्ट कराने के लिए जिम्मेदारी वार्ड ब्वॉय व कर्मचारी की होती है। इनकी संख्या कम होने के कारण वार्ड ब्वॉय व कर्मचारी परिजनों को ही ऑक्सीजन सिलेंडर का स्टैंड थमाकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेता है। परेशान परिजन आक्सीजन सिलेंडर खाली है या नहीं जानता है। मीडिया सेल प्रभारी व प्रवक्ता डा. संतोष कुमार कहना है कि ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। दिक्कत होने की कोई शिकायत अभी तक नहीं दी गयी है।

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