लखनऊ। दवाओं में ई-फॉर्मेसी के विरोध में दवा व्यापारियों ने शुक्रवार को मेडिकल स्टोर बंद करके विरोध जताया। दवा व्यापारियों का कहना है कि ई-फॉर्मेसी को बढ़ावा देने से दवाओं में गड़बड़ी होने पर जांच के लिए सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकेगी। दवा दुकानें ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के तत्वावधान में लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के बंद का असर राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिला। केजीएमयू के बाहर स्थित दुवा की दुकानें बंद रहने से मरीज परेशान हो गये। कमोबेश यहीं हाल पीजीआई, बलरामपुर, सिविल अस्पताल के आस- पास मरीज दवाओं के लिए परेशान हो गये। कमोबेश निजी अस्पतालों में दवा लेने के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन उप्र. के आवाह्न पर शुक्रवार को राजधानी की लगभग दवा की दुकानों के सभी दवा दुकानें बंद रहीं। लखनऊ की सबसे प्रमुख बाजार अमीनाबाद मेडिसिन मार्केट, गोमती नगर, अलीगंज, कैसरबाग, आलमबाग, चौक, मेडिकल कॉलेज समेत अन्य इलाकों में होलसेल व रिटेल की करीब छह हजार दवा दुकानें सुबह से बंद थी। राजधानी की लगभग छह हजार हजार दवा दुकानों पर ताला लटका रहा। लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन लखनऊ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश कुमार का कहना है कि दवा की दुकानें बंद होने से करीब 90 करोड़ रुपए का व्यापार प्रभावित हो गया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में दुकानें खुली रहीं मरीजों के हितों को देखते हुए सरकारी अस्पताल व निजी अस्पताल के अंदर चल रहे मेडिकल स्टोर को बंद में शामिल नहीं किया गया। इसके बावजूद अस्पतालों में अधिक भीड़ और दवा दुकानें बंद होने का असर दिखा।
दवा की दुकाने बंद होने से तीमारदार परेशान हो गये तो कुछ मरीजों को कम दवाएं ही मिलीं। इमरजेंसी में मरीजों को दवाएं मिलीं। लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी विकास रस्तोगी का कहना है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश द्वारा खुदरा दवा दुकानों को जारी ड्रग लाइसेंस के अनुपात में फार्मेसिस्ट की व्यवस्था नहीं की गई है। ई-फॉर्मेसी को बढ़ावा न दिया जाए। ऑनलाइन दवा खरीदने पर यदि मरीज डॉक्टर बदलेगा तो दवा वापस करने की दिक्कत होगी। सामान्य व्यक्ति को दवा लेने से दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
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