लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेजिडेंट डॉक्टरों की सुरक्षा में अब बाउंसर तैनात किए जाएंगे। संवेदनशील विभागों के बाहर पुलिस का पहरा भी रहेगा। यही नहीं ट्रामा सेंटर में आए दिन सही इलाज ना मिलने के कारण मारपीट करने वाले तीमारदारों पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस चौकी भी बनाने की मंजूरी मिल गई है। पिछले कुछ घटनाओं में लगातार रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों को पीटने वाले तीमारदारों को पकड़ने में नाकाम रहने वाली सुरक्षा एजेंसी को हटाने की अनुमति केजीएमयू प्रशासन ने दे दी है। यह सब मांगे मंगलवार को रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों ने लंबी वार्ता के बाद मान ली।
बताते चलें रविवार की रात को बाल रोग विभाग में एक बच्चे की मौत पर तीमारदारों ने रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ मारपीट तो की ही थी साथ में महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ अभद्रता भी कर दी थी। रेजिडेंट डॉक्टर कुछ दिन पहले ट्रामा सेंटर में तीमारदारों द्वारा मारपीट की घटना में कोई कार्यवाही ना होने पर आक्रोशित थे। इस घटना के बाद उनका आक्रोश फूट गया और वह रात में ही हड़ताल पर चले गए लगभग 3 घंटे चली हड़ताल में केजीएमयू में भर्ती मरीज हलकान हो गए और प्रशासनिक अधिकारी रेजिडेंट डॉक्टरों को समझा समझा कर परेशान हो गए। बिना सुरक्षा के रेजिडेंट डॉक्टर काम करने को बिल्कुल तैयार नहीं थे उधर केजीएमयू के जिम्मेदार अधिकारी उन्हें एक बार फिर आश्वासन का कागज थमाकर काम कराने के लिए निर्देश दे रहे थे।
लगभग 3 घंटे चली हड़ताल के बाद रेजिडेंट डॉक्टर दूसरे दिन फाइनल बैठक कर अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के साथ बैठक करने को तैयार हो गए और हड़ताल समाप्त कर दी। दूसरे दिन सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ शंखवार, चिकित्सा अधीक्षक , ट्रामा सेंटर प्रभारी डॉक्टर संदीप तिवारी सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी बैठक में आए लेकिन लापरवाह एजेंसी को तत्काल हटाने के लिए कोई वादा नहीं कर सका और ना ही प्रेसिडेंट डॉक्टरों को विभाग में काम करने के दौरान सुरक्षा देने के लिए तैयार हुआ। बैठक बेनतीजा रही और मंगलवार को कुलपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करने का समय तय हुआ। आज हुई बैठक में कुलपति के साथ केजीएमयू प्रशासन ने भी उनकी सुरक्षा का वादा करते हुए कई महत्वपूर्ण मांगे पूरी कर दी।
रेजिडेंट डॉक्टर मानकर चल रहे हैं अभी सब कुछ ऑल इज वेल है आगे इतनी सुरक्षा के बावजूद कोई तीमारदार मारपीट ना कर बैठे और पकड़ा भी ना जाए यह मुश्किल लग रहा है। उधर इस घटना के बाद कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों और अधिकारियों का मानना है कि रेजिडेंट डॉक्टरों को इलाज के दौरान व्यवहार कुशल होने का ज्ञान एक बार फिर देना होगा। जबकि रेजिडेंट डॉक्टर पहले ही अपने साथ वरिष्ठ डॉक्टरों को ड्यूटी पर रहने की मांग कर चुके हैं उनका कहना है मरीजों का बढ़ता दबाव सब उन्हीं पर रहता है डॉक्टर कहते हैं काम नहीं करोगे तो सीखने को कैसे मिलेगा। सीखने के लिए सिखाने वाला भी तो साथ में होना चाहिए फिलहाल यह मुद्दा अगला हो सकता है। अभी तो सब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
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