शव पोस्टमार्टम हाऊस ले जाने के लिए फरियाद करता यह

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान हैदरगढ़ की अधिवक्ता खुशबू (24) की मौत हो गई। बेटी के पिता का आरोप है कि इलाज में लापरवाही नहीं की जाती तो शायद उनकी बेटी बच सकती थी।लापरवाही का आलम यह कि बेटी की मौत बेहाल पिता ने जब शव को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाने के लिए फरियाद करते रहे, ड्यूटी पर सो रहे कर्मचारियों ने उनकी बात को अनुसनी की तो उन्होंने वीडियो बना अधिकारियों को दिखाने की सोची। वीडियों बनता देख कर्मचारियों ने उनसे गाली-गलौज करते हुए इलाज के कागज फाड़ दिए अौर जबरन मोबाइल छीन कर वीडियो डिलीट करा दिया। डाक्टरों व तीमारदारों ने मौके पर मामला शांत कराया अौर उनका मोबाइल वापस करा दिया। सेंटर प्रशासन का कहना है कि इसकी जांच कराकर दोषी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

हैदरगढ़ निवासी शिव बक्स अंबेडकर नगर स्थित बड़ौदा ग्रामीण बैंक में तैनात है। जानकारी के अनुसार उनकी बेटी खुशबू हैदरगढ़ तहसील में अधिवक्ता थी। परिजनों के अनुसार शुक्रवार को बेटी स्कूटी से कचहरी से घर लौट रही थी। रास्ते में त्रिवेदीगंज में अज्ञात वाहन की टक्कर मार दी। इसमें वह बुरी तरह से घायल हो गई थी। वह लोग बेहतर इलाज के लिए केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया था। उन्होंने बताया कि ट्रामा सेंटर के न्यूरोलाजी वार्ड में भर्ती किया गया था। इसके बाद शनिवार को उसे आइसीयू मेडिसिन में शिफ्ट कर दिया गया।

इलाज के दौरान रविवार सुबह करीब छह बजे बेटी की इलाज के दौरान मौत हो गई, उनका आरोप है कि आइसीयू में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी सो रहे थे। उन्होंने जब ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से कागजी कार्रवाई पूरी कर शव पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाने के लिए जगा कर अनुरोध किया, तो वह नींद में थे आैर बाद में आने के लिए कहकर कुछ देर बाद आने के लिए कहा। कुछ देर बाद फिर पहुंचे तो कर्मचारी सोते मिले। उन्होंने ड्यूटी के दौरान सो रहे कर्मचारियों का मोबाइल में वीडियो बनाने लगे और अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही। इस पर कर्मचारी भड़क गये आैर उनसे धक्का मुक्की करते हुए मोबाइल छीन लिया और गाली-गलौज की।

कर्मचारियों ने मोबाइल से वीडियो डिलीट कर दिया। कर्मचारियों ने धमकी कि अगर हमने चाह लिया तो यहां से बाहर नही जा सकते। इस दौरान पिता का शोर शराबा सुनकर अन्य डॉक्टर व तीमारदार आ गए और उन्होंने समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद कर्मचारियों ने मोबाइल वापस किया। इसके बाद चौक थाने को मेमो भेजा और कागजी कार्रवाई पूरी कर करीब नौ बजे शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

पीड़ित पिता का आरोप है कि ट्रामा के डॉक्टर और कर्मचारी की लापरवाही से वहां भी ठीक से इलाज नहीं होता था। ग्लूकोज की बोतल खत्म हो जाती थी। बोतल बदलने के लिए काफी देर तक टाल मटोल करते रहते थे। मेडिसिन आइसीयू में भी रात में अक्सर डॉक्टर और कर्मचारी सोते ही रहते थे। चिकित्सा अधीक्षक ट्रामा सेंटर डा. संतोष कुमार आइसीयू में कर्मचारियों की 24 घंटे की ड्यूटी होती है। वहां कोई कर्मचारी सोए ऐसा संभव नहीं है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

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