लखनऊ। मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में आईसीयू मरीजों को दी जानी वाली डाइट में कीड़ा निकलने मामले में शनिवार को जांच शुरू हुई आैर समाप्त हो गयी। जांच करने वाली टीम को खाने में कीड़े वाला मरीज नहीं मिला है। जब कि कर्मचारियों की तलाश ही नही की गयी, जिन्होंन सबसे पहले खाने में कीड़ा देखा था। पर्यावरण विभाग से डॉक्टरों की टीम शनिवार को ट्रॉमा सेटर पहुंची। टीम का दावा है कि उन्होंने ट्रामा सेंटर में कीड़ा निकलने वाले मरीज की तलाश की, पर टीम को कोई मरीज नहीं मिला है। टीम का दावा है कि जल्द ही जांच कर कुलपति को रिपोर्ट दे देगी। उधर कुलपति का कहना है मामले की जांच में प्रथम दृष्टया जांच में अभी तक मरीज ही नहीं मिला है।
मालूम हो कि केजीएमयू में मरीजों को खाने की आपूर्ति का ठेका गुजरात की एक कम्पनी को तीन साल पहले दिया गया था। रोजाना करीब 2 हजार मरीजों को खाना इसी किचन में बनाकर मरीजों को बाटा जाता है, जबकि 40-50 आईसीयू के मरीजों को लिक्विड डाइड बनकर सभी आईसीयू व पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में सप्लाई होती है। ट्रॉमा सेंटर के पोस्ट ट्रॉमा वार्ड में आईसीयू मरीजों के लिए बनने वाली लिक्विड डाइड किचन कर्मचारी देकर गए थे। वहां के स्टॉफ ने लिक्विड डाइड को छाना तो देखा उसमें कीड़े थे। मामले की शिकायत किचन संचालक से की, लेकिन जांच कराने का दावा किया गया। कीड़ा निकलने की शिकायत सीएम कार्यालय तक पहुंची।
वहां से मामले की जांच के आदेश दिए। पर्यावरण विभाग की प्रभारी डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव, डॉ. परवेज अहमद को कुलपति ने तलब करके जांच के आदेश दिए हैं। बताते है कि जांच करने पहंुची टीम अभी कुछ तय नहीं कर पायी है। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि मरीज की जगह कर्मचारियों से पूछताछ की रही है। कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट का कहना है रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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