लखनऊ। डाक्टर साहेब , हमारा भाई जल गया है…. यहां मेडिकल कालेज में भर्ती हुआ है। कहां है… यह कहते हुए सतीश की परेशान निगाहें ट्रामा सेंटर के अंदर आते जाते मरीजों में कु छ तलाश करने लगती है। यह तो एक उदाहरण है कि रायबरेली के एनटीपीसी में ब्वायलर ब्लॉट के बाद लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल में घायलों में अपनों की तलाश करने की। जैसे ही रायबरेली में काम करने गये साथियों, रिश्तेदारों के घायल होने की सूचना मिली। वैसे ही लोग उनकी तलाश में निकल पड़े।
ट्रामा सेंटर पहुंचे राकेश ने घबराते हुए गेट पर खड़े सुरक्षागार्ड से अपने रिश्तेदार का नाम पूछ कर जानकारी मांगी। पीआरओ के पास उसे भेज दिया आैर परिचितों तक पहुंचाने में मदद की। यही नहीं रायबरेली में मजदूर व कर्मी एनटीपीसी में तैनात थे आैर इस घटना में घायल होने की सूचना पाकर परेशान थे। वह सब लखनऊ घायलों के आने की सूचना मिलते ही केजीएमयू व सिविल अस्पताल पहुंचने लगे। घायलों में ज्यादातर लोग झारखंड के निवासी थे आैर यहां पर उनके परिचित वाले खोज खबर लेने पहुंचने लगे। वेंटिलेटर यूनिट के बाहर खड़ी सुमित्रा ने बताया कि उसके पास फोन राय बरेली से आया था। उनके परिचित के लोग है आैर घायल लखनऊ पहुंचे है।
जानकारी मिलने के बाद वह सिविल अस्पताल तलाशने के बाद केजीएमयू पहुंची है। ट्रामा सेंटर प्रभारी डा. हैदर अब्बास बताते है कि लगातार लोग अपनो की तलाश करते हुए आ रहे है। घायलों की लिस्ट पीआरओ के पास है आैर उनके पूछते ही मरीजों की जानकारी देने के साथ ही उन्हें मरीज के पास तक पहुंचा दिया जाता है।




