लखनऊ। डायबटीज के इलाज में ग्लाइसेमिक पेंटैड कारगर हो रहा है। लगातार अध्ययन के बाद पाया गया है कि डायबटीज के इलाज के दौरान जांच में सिर्फ फास्टिंग व पीपी की रिपोर्ट पर ज्यादा ध्यान न देकर मरीज ग्लाइसेमिक भिन्नता को देखना चाहिए। इससके अलावा मनोवैज्ञानिक स्थिति व सामाजिक आर्थिक भिन्नता को भी देखना महत्वपूर्ण है।
यह जानकारी डायबिटीज विशेषज्ञ डा. अनुज माहेश्वरी ने पत्रकारवार्ता में दी। पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि ग्लाइसेमिक पेटैंड डायबिटीज के इलाज में बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाता है। इसमें इलाज के दौरान एफपीजी, पीपीजी आैर एचबीएउ1सी पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए । बल्कि इलाज के दौरान मरीज की ग्लाइसेमिक भिन्नता को खास तौर पर देखना चाहिए।
इसमें ब्लड में शुगर की मात्रा घटती -बढ़ती रहती है जो कि मरीज के लिए ज्यादा खतरनाक होती है। उन्होंने बताया कि अगर डायबिटीज से बचना चाहते हैं तो तनाव लेना छोड़ दे। उन्होंने बताया कि व्यायाम के लिए समय का अभाव रहता है आैर खान-पान पर ध्यान नहीं देते है वह इस बीमारी की चपेट में आ सकते है। उन्होंन बताया कि डिनर सोने के लगभग चार घंटा पहले ही लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कामकाज में तनाव को लेकर युवा वर्ग डायबिटीज की चपेट में अधिक आ रहे हैं। तनाव से बचने के लिए लोग योग भी करना चाहिए। खास तौर अगर नियमित व्यायाम भी करते है तो तनाव मुक्त रह सकते है। उन्होंने बताया कि भारत में डायबिटीज क्वालिटी आफ लाइफ को सुधारना होगा।















