लखनऊ। जीवा आयुर्वेद के प्रमुख आयुर्वेदचार्य डा. प्रताप चौहान का कहना है कि ऑस्टियोआर्थराइटिस रोग जाइंट्स की हड्डी टूट जाने या डैमेज हो जाने के कारण होता है।ऑस्टियोआर्थराइटिस या संधिवात बढ़ती उम्र में होने वाली सामान्य बीमारी है, हालांकि बदलती जीवनशैली में अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेंट में आ रहे है। यह दावा डा. चौहान ने बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता में सम्बोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि एक शोध से मिले आंकड़ों के अनुसार 60.65 वर्ष की आयु में होने वाला रोग ऑस्टियोआर्थराइटिस अब 30.35 वर्ष तक के लोगों को भी अपना शिकार बना रहा है। युवाओं का ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी बीमारी से पीड़ित होना अपने आप में काफी चिंताजनक है। संधिवात के लक्षणों में घुटनों, गर्दन, कंधे, पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों और हाथ के जोड़ों में दर्द होता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस के दौरान सूजन, नींद न आना, शारीरिक और मानसिक तनाव, लंबे समय तक चलने या खड़े होने, सीढ़ियां चढ़ने या उतरने के समय, जमीन पर बैठने और झुकने में दर्द होता है।
आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रताप चौहान बताते हैं कि आयुर्वेद प्रत्येक मरीज को विशिष्ट मानकर रोग के समूल उपचार की व्यवस्था करता है। वर्षों के अनुसंधान के बाद जीवा आयुर्वेद ने जीवा आर्युनिक प्रणाली बनाई है, जो कि प्रत्येक मरीज को होने वाले रोग के मूल कारणों को पहचान कर शरीर की क्षमताओं के अनुकूल उपचार प्रदान करती है। उन्होंने कु छ मरीजों के उदाहरण भी दिये, जिन्हें दवा से फायदा हो रहा है।
वरिष्ठ आयुर्वेदिक फिजिशियन आर एस सक्सेना बताते हैं कि भोजन की आदतों और जीवनशैली में बदलाव करके ऑस्टियोआर्थराइटिस का सफल इलाज संभव है। शुरुआती निदान के तौर पर रोगी जोड़ों के दर्द की अनदेखी न करें, क्योंकि जोड़ों के दर्द की अनदेखी ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारी को जन्म दे सकती है।












