लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के जनरल सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ सर्जन्स ने गले में थायरायड ट¬ूमर को इंडोस्कोपी तकनीक थायरोडेक्टमी सर्जरी कर दी। अभी तक थायरोडेक्टमी सर्जरी में लगे में निशान पड़ जाता था। इससे अक्सर मरीज परेशान रहते थे। इस तकनीक से सर्जरी करने पर निशान नहीं दिखते है। डाक्टरों का दावा है कि जनरल सर्जरी विभाग में यह पहली इंडोस्कोपी सर्जरी है।
विशेषज्ञ सर्जन डा. विनोद जैन ने बताया कि राय बरेली निवासी 25 वर्षीय मरीज राम भुवन के गले में थायरायड ट¬मूर था। इसके कारण गले में सूजन बनी हुई थी आैर खाना निगलने में उसे परेशानी हो रही थी, पर मरीज थायरोडेक्टमी सर्जरी के कारण गले में पड़ने वाले निशान से भी चिंतित था। मरीज की परेशानी को देखते हुए सर्जन्स ने इंडोस्कोपी सर्जरी करने की तैयारी शुरू की। इसमें पारम्परिक मिड लाइन गर्दन के निशान के बजाय छोटे 5 से 10 मिमी चीरे को हाथ के गड्ढे में बना दिया गया। ताकि वह कपड़े के नीचे छिप जाते है।
सर्जरी में थायरायड ट¬ूमर को आर्म पिट के माध्यम से हटा दिया गया। इसमें किया गया निशान बाहर नहीं दिख रहा था। तीन से चार घंटे चलने वाली सर्जरी में बहुत कम ब्लडिंग होती है। जटिल सर्जरी के बाद भी मरीज सहज रहता है। सर्जरी के दूसरे दिन उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि सर्जरी करने वाले में उनके साथ डा. गीतका नंदा सिंह, डा. पारिजात सूर्यवंशी,सीनियर रेजीडेंट डा. पंकज व डा. प्रनव भी मौजूद थे। जब कि एनेस्थिसिया में डा. अनिता मलिक, डा. प्रतिभा, डा. प्रिया व डा. विभूला भी थी। डा. विनोद जैन ने बताया कि थायरायड ट¬ूमर को बिना गर्दन पर दिखने वाले शल्य निशान के निकाल सकते है। यह सर्जरी बहुत कम चिकित्सा केन्द्रों पर होती है। निजी अस्पतालों में कम से कम दो लाख लागत आती है। जब कि केजीएमयू में पांच हजार रुपये में होती है।











