लखनऊ। डेंटल क्लीनिक चलाने वाले डाक्टरों को अब बायोमेडिकल वेस्ट का प्रमाण पत्र स्वास्थ्य विभाग को देना होगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी डेंटल क्लीनिक संचालकों को नोटिस भेज कर चेतावनी दे दी है। वायोमेडिकल वेस्ट के नियमों को रविवार को यूपी डेंटल शो में डेंटल डाक्टरों को जानकारी दी गयी। इसके अलावा रूट कैनाल करने के लिए माइक्रोसर्जरी व नयी तकनीक की जानकारी दी गयी।
इंडियन डेंटल एसोसिएशन के तत्वावधान में चल रहा दो दिवसीय कार्यशाला में आज में डेंटल डाक्टरों को बायोमेडिकल वेस्ट मैनजमेंट की जानकारी दी गयी। डा. अनिल चंद्रा ने बताया कि अब सभी डेंटल क्लीनिकों को बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का प्रमाण पत्र देना होगा। स्वास्थ्य विभाग से नोटिस जारी की गयी है। हालांकि अभी तक काफी संख्या में डाक्टरों ने बायोमेडिकल वेस्ट मैनजेमेंट का प्रमाण पत्र बनवा लिया है आैर उसके नियमों का पालन कर रहे है। इसके अलावा डा. अतुल ने रूट कैनाल में माइक्रोस्कोपिक सर्जरी की तकनीक की जानकारी दी। इसके लिए पांच माइक्रोस्कोप भी लगाये गये थे। उन्होंने बताया कि अक्सर रूट कैनाल करके फीलिंग के बाद भी दर्द होने लगता है।
ऐसे में माइक्रोस्कोप से देखकर सटीक सर्जरी की जा सकती है। कार्यक्रम में डा. लक्ष्य यादव ने बताया कि आरसीटी के बाद डायक्रोटिकल इप्लांट तीन महीने में किया जाता था। अब उसे तीन दिन में किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आरसीटी करते वक्त अक्सर सुईयां टूट जाती है। इस लिए इंडोमोटर तकनीक से किया जाता है। कार्यशाला में दूर दरादराज जनपदों से डाक्टरों ने विशेषज्ञ डाक्टरों से सवाल भी किया। जिसका जवाब भी दिया गया। डा. अनिल चंद्रा ने बताया कि कार्यशाला का उद्ेश्य डेंटल डाक्टरों को नयी तकनीक की जानकारी देना है।











