देशी तकनीक से फर्जी प्लेटलेट्स

0
789

लखनऊ । ठाकुरगंज में फर्जी ब्लड बैंक में मिले प्लेटलेट्स बैग को देख कर सभी स्वास्थ्य अधिकारियों के होश उड़ गये है। प्लेटलेट्स को ब्लड से अलग करने की एक ब्लड सपरेटर विशेष मशीन आती है। यह मशीन कुछ ही निजी अस्पतालों के ब्लड बैंक में लगी है। इस मशीन में ब्लड को काफी देर तक स्पिन कराने के लि इसके बाद उसे बैग में भरा जाता है, अगर सूत्रों पर यकीन करे तो कि फर्जी ब्लड बैंक में देशी तरीके से प्लेटलेट्स बनाने का दावा किया जाता था, लेकिन हकीकत में वह प्लाज्मा होती थी।

Advertisement

उसको अलग होने जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि बैग में प्लेटलेट्स है या प्लाज्मा भरा हुआ है। अगर सूत्रों की माने की देशी तरीके से निकाले गये प्लाज्मा को मानक के विपरीत प्लेटलेट्स को प्लाज्मा बताकर बेच दिया जाता था। मरीज को भी प्लाज्मा चढ़ने से कोई परेशानी तो नही होती थी, लेकिन उसका प्लेटलेट्स नही बढ़ने पर उसकी बीमारी ठीक नहीं हो पाती है। बताया जाता है कि ब्लड को एक बैग में करके टांग दिया जाता है लगभग तीन से चार घंटे के बाद आयरन ज्यादा होने के कारण आरबीसी नीचे बैठ जाती है आैर प्लाज्मा ऊपर रह जाता है। इसको अलग करके बैग में भर कर प्लेटलेट्स के नाम पर बेच दिया जाता था।

Previous articleसमय से होती कार्रवाई तो पकड़ा लिया जाता फर्जी ब्लड बैंक
Next articleएचवन एनवन के तीन मरीज मिले

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here