रोज करें 15 तरीके के योग आसन, रहें निरोग -केजीएमयू

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लखनऊ । कई बीमारी को योग के जरिए ठीक किया जा सकता है लेकिन इसका लाभ तभी मिलेगा योगाभ्यास करने के समय सहजता, सुख आैर स्थिरिता का अनुभव हो। ऐसा तब होगा जब कठिन योगासन का निरंतर अभ्यास करते रहेंगे तो सहजता आैर सुख अनुभव करने की स्थिति आएगी। यह बात किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कन्वेंशन सेन्टर में बुधवार को आयोजित फाउंडेशन एण्ड प्रैक्टिस ऑफ योगा फॉर हेल्दी लीविंग पर व्याख्यान देते हुए मोरार जी देशाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा नयी दिल्ली के डा. ईश्वर बसवरेड्डी ने कहा कि कम से 15 योगासन करने से स्वस्थ रह सकते हैं। योग अध्यात्म के लिए अति आवश्यक है। योग एक दर्शन है, योग विज्ञान है, योग स्वस्थ्य जीवन जीने की कला है, यह जीवन में समरसता लाता है, योग का अभ्यास मानव मन को शांत करता है।

आज पूरा राष्ट्र इस समय लखनऊ की तरफ टकटकी लगाये बैठा है। प्राचीन जीवन पद्धति लिए योग, आज के परिवेश में हमारे जीवन को स्वस्थ और खुशहाल बना सकते है। आज के प्रदूषित वातावरण में योग एक ऐसी औेषधि है, जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है, बल्कि योग के अनेक आसन, प्राणायाम आदि ब्लड प्रेशर आदि को नार्मल करते है और जीवन के लिए संजीवनी है। योग में ऐसे अनेक आसन हैं जिनको जीवन में अपनाने से कई बीमारियां समाप्त हो जाती हैं और खतरनाक बीमारियों का असर भी कम हो जाता है। स्वस्थ रखने के साथ ही योग हमें पॉजिटिव एनर्जी भी देता है। योग शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है। योग एक सुरक्षात्मक मेडिसिन है।

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आसन प्राणायाम, ध्यान से मन शांत होने पर स्वस्थ जीवन का आरंभ होता है। शास्त्रों से 128 प्रकार योग की जानकारी मिलती है, जिनमें से मुख्य योग है वेदांत , सांख्य योग, तांत्रीक योग, जैन योग, बुधिष्ट योग, सूफी और पारम्परिक योग है। देश में 5000 वर्ष से योग संस्कृति चली आ रही है। स्वास्थ्य के तीन स्तम्भो के बारे बताते हुए उन्होंने कहा कि आहार, निद्रा आैर ब्राह्चर्य है। योग की अवधारणा आहार, विहार, आचार, वीचार एवं व्यवहार से हैं। इस अवसर पर चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने डा. रेड्डी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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