लखनऊ। पुराने लखनऊ के ठाकुरगंज क्षेत्र में पकड़े गये फर्जी ब्लड बैंक में निगेटिव ग्रुप के ब्लड की आपूर्ति मांग के अनुसार अधिक कीमत में होती थी। इसके अलावा अन्य सामान्य ब्लड ग्रुप भी डिमांड के अनुसार आपूर्ति किये जाते थे, अगर सूत्रों की माने तो निगेटिव ब्लड ग्रुप की मांग के अनुसार कोड वर्ड भी रखे गये थे, कोड वर्ड के अनुसार कीमत भी इनकी तय थी। ब्लड ग्रुप लेने के अलावा अन्य किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती थी।
कोड वर्ड से होती थी निगेटिव ब्लड ग्रुप की आपूर्ति
पकड़े गये अभियुक्त से पूछताछ के बाद पुलिस आैर स्वास्थ्य विभाग गहन जांच पड़ताल में लग गयी है। अगर सूत्रों की माने तो अभियुक्त समय -समय पर ब्लड ग्रुप के कोड वर्ड भी बदला करते थे। बताया जाता है कि इन लोगों ने सबसे ज्यादा कोड वर्ड निगेटिव ब्लड ग्रुप के लिए ही रखे थे। अगर सूत्रों की माने को ए निगेटिव ब्लड ग्रुप के लिए प्रियंका कोड वर्ड था आैर इसकी कीमत मांग के अनुसार 15 हजार रुपये से शुरु होती थी। यही बी निगेटिव ब्लड ग्रुप के लिए दीपिका कोड वर्ड रखा गया था। इसकी कीमत भी दस हजार रुपये से शुरु होती थी। इसी प्रकार ओ पाजिटिव ग्रुप के लिए जीवनरक्षक रखा गया था। इसकी कीमत भी आठ हजार से शुरु होती थी।
इसके अलावा दुर्लभ मिलने वाला एबी निगेटिव का कोड वर्ड बाहुबली रखा गया था। इसकी कीमत ही 15 हजार रुपये प्रति यूनिट शुरु होती थी आैर ज्यादा यूनिट लेने पर भी कीमत कम नही होती थी, बल्कि एडवास भी ले ली जाती थी। बताते चले कि यह कीमत राजधानी में चले रहे केजीएमयू, सरकारी ब्लड बैंक व अधिकृत ब्लड बैंक में निगेटिव ब्लड ग्रुप की कमी के साथ ऊपर नीचे होती रहती थी। इसके अलावा सामान्य रूप से मिलने वाले पाजिटिव ब्लड ग्रुप के कोड वर्ड रखे गये थे यह कोड वर्ड समय के अनुसार बदल भी दिये जाते थे आैर स्टीकर भी बदल जाते थे आैर रसीद भी थमा दी जाती थी।















