लखनऊ। कभी न कभी हर व्यक्ति एसिडिटी से पीड़ित होता है लेकिन जब एसिडिटी नियमित अवधि बढ़ने लगें और व्यक्ति की जीवनशैली को प्रभावित करने लगें तो यह बीमारी शरीर को कोई स्थायी नुकसान पहुंचाए, उससे पहले एक विषेशज्ञ से सलाह लेना बहुत जरूरी है। प्रदेष के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स के अनुसार, लगभग 78 फीसदी मरीज, जिनका वो पाचन की विभिन्न समस्याओं के लिए इलाज करते हैं, एसिडिटी की शिकायत करते हैं लेकिन विरोधाभास यह है कि ये मरीज खुद का उपचार करके प्रयोग करते रहते हैं और आहार में परिवर्तन करके ओवर-द-काउंटर दवाईयों से लगभग 2 महीने तक खुद ठीक होने की कोशिश करते हैं और उसी के बाद मेडिकल मदद के लिए आते हैं।
गैस्ट्रिक एसिड से होने वाली कटाव जैसी जलन कई समस्याएं पैदा करती है :
डाक्टरों का कहना है कि मरीज, खासकर उत्तरप्रदेष में, पहले ओवर-द-काउंटर दवाईयों का सहारा लेते हैं, जिनमें कई आयुर्वेदिक विकल्प भी शामिल हैं, और एसिडिटी के लिए काफी लंबे समय तक इन दवाईयों का प्रयोग करने के बाद उन्हें अहसास होता है कि उन्हें मेडिकल विषेशज्ञ की जरूरत है। एसिडिटी से जीवनषैली और नींद प्र्रभावित होती है। जब पेट एवं आहारनली के बीच मौजूद स्फिंक्टर में कोई कमी आ जाती है, तो पेट में मौजूद एसिड ऊपर की ओर बढ़ता है और आहारनली के संपर्क में आकर एसिडिटी करता है। यदि यह एसिड रिफ्लक्स नियमित तौर पर होता है, तो गैस्ट्रिक एसिड से होने वाली कटाव जैसी जलन कई समस्याएं पैदा करती है। डॉक्टरों का कहना है कि उत्तरप्रदेश में लगभग आधे मरीज दिन में एसिडिटी से पीड़ित होते हैं। गले में जलन के कारण कई मरीजों को क्रोनिक कफ की षिकायत होती है।
- कुछ मरीज वॉमिटिंग (उल्टी आने) की शिकायत भी करते हैं।
- यद्यपि ये छोटी मोटी समस्याएं प्रतीत होती हैं, जिनके साथ व्यक्ति अपनी जिंदगी गुजार सकता है, लेकिन लंबे समय के बाद इसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान श्वास की समस्याओं से लेकर गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल अल्सर भी कर सकते हैं।
- इसलिए इसका समय पर इलाज जरूरी है। समय के साथ ये छोटी मोटी समस्याएं आहारनली को संकरा और पतला कर सकती हैं, जिससे खाना निगलने में काफी कठिनाई और कश्ट भी हो सकता है।
- डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के एचओडी डा. प्रशांत वर्मा ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल एसिडिटी के मामले बढ़े हैं।
लंबे समय तक इस बीमारी का इलाज न कराने से प्रदेष में एसिडिटी से पीड़ित 5 फीसदी मरीजों में कैंसर का खतरा भी हो सकता है। एरोबिक एवं कार्डियो एक्सरसाईज वजन को कम रखने के लिए काफी फायदेमंद हैं और एसिडिटी को भी खत्म करती हैं। वॉकिंग तथा स्विमिंग भी बहुत अच्छे व्यायाम हैं। आपको ऐसे व्यायाम नहीं करने चाहिए, जिनसे पेट पर कोई भी दबाव पड़े।















