एलडीए के बाबू ने अपहरणकर्ताओं पर रिवाल्वर तानकर अपनी जान बचायी

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लखनऊ । गोमतीनगर स्थित लखनऊ विकास प्राधिकरण के भवन में मंगलवार को करीब 20 लोगों के समूह ने एक बाबू के अपहरण का प्रयास किया  लेकिन अपहरणकर्ताओं को मामूली बाबू नहीं मिला उन्होंने तत्परता दिखाते हुए अपहरणकर्ताओं पर रिवाल्वर तान कर जान बचायी। दोपहर करीब 2.30 एलडीए में तैनात बाबू एमएन ओझा के अपहरध का प्रयास किया गया और उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए रिवाल्वर निकालनी पड़ी। 

सूत्रों के मुताबिक 15 लाख के प्लाट आवंटन के मामले को लेकर ये काण्ड किया गया और बीच बचाव में उसने रिवाल्वर निकाली हलांकि जब पुलिस मौके पर पहुंची तब तक अपहरणकर्ता फरार हो गये।
ओझा ने बताया कि करीब 20 लोग उस पर दबाव बनाने आये थे कि 1/392 बसंत कुंज स्थित जो प्लाट आदर्श अग्रवाल के नाम है। वह उन लोगों के नाम कर दिया जाये। मुख्य रूप से घ्नशम मिश्रा और अमरीश अपने आप को मुन्ना बजरंगी से जुड़ा बता रहे थे। वे कई दिन से 15 लाख रुपये की रंगदारी मांग रहे थे। 

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इस मामले में मुन्ना बजरंगी को नामजद कर लिखित तहरीर गोमती नगर थाने में दी गयी है। गोमतीनगर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल कर रही है उनकी ओर से देर शाम एफआईआर दर्ज करने का आश्वासन दिया गया। वहीं थनाध्यक्ष गोमतीनगर मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात थे। 

एलडीए भवन की सुरक्षा की पोल खुली ये हाल तब है जब बीते चार साल में सुरक्षा का बजट 93 लाख से बढ़ाकर 9 करोड़ तक पहुंच गया है। खुद एलडीए में प्राइवेट सुरक्षा कर्मियों को छोड़ कर करीब 27 सिपाही और 2 दारोगा  तैनात है। लखनऊ विकास प्राधिकरण हर महीने सुरक्षा व्यवस्था पर लगभग सवा करोड रुपये खर्च कर राह है। प्राधिकरण मुखयलय समेत योजनाओं और पार्कों में बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मी तैनात किये गये है। इससे पहले इसी बाबू पर फर्जी आवंटन के बदले 15 लाख सुविधा शुल्क लेने की बात सामने आयी थी। लखनऊ विकास प्राधिकरण में अंदर घुसते ही सुरक्षा कर्मी और मेटल डिटेक्टर लगाय गये हें। फिर भी लगभग 20 लोग एक साथ अंदर घुस आये और जिसमें से एक के पास असलहा भी था। वहीं एलडीए परिसर में फरियादियों को शष्त्र लेकर आने की अनुमति नहीं है।

बताते चलें कि इस तरह की घटना कोई नयी नहीं है। इससे पहले मुख्य अभियंता के कक्ष में टेंडर को लेकर दो गुट आपस में भिड़ गये थे। वहीं एलडीए के मुख्य सचिव जय शंकर दुबे ने कहा कि ये सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी लापरवाही है। समीक्षा बैठक कर जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगा जायेगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई भी जायेगी। 

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