लखनऊ। प्रादेशिक चिकित्सा सेवा संघ की केन्द्रीय कार्यकारिणी चुनाव के लिए सरकारी अस्पतालों में प्रत्याशियों ने प्रचार-प्रसार में अपनी ताकत झोंक दी है। खास तौर पर ओपीडी के समय चुनाव प्रचार जोर पकड़ता है। 11 मई से चुनाव लड़ रहे ज्यादातर प्रत्याशी अवकाश लेकर एक से दूसरे जनपद अपने पक्ष में वोट डालने के लिए प्रचार कर रहे हैं। प्रत्याशियों ने डाक्टर अपनी समस्याएं बताते हैं आैर उनके निराकरण का अश्वासन मिलने पर वोट की हामी भरते हैं। डाक्टरों का कहना है कि इस बार पीएमएस संगठन को अपनी बात बजबूती से रखने होगी, तभी चिकित्सा सेवाएं बेहतर हो पाएंगी।
बलरामपुर अस्पताल के एक डाक्टर बताते हैं कि पूरे प्रदेश जिला स्तरीय अस्पताल में सबसे ज्यादा बेड हैं, पिछले दस सालों में मरीजों की संख्या हजारों के अनुपात में बढ़ी है। इसके बावजूद डाक्टरों की सृजित पद नहीं बढ़ाये गये। इसके अलावा वीआईपी ड्यूटी, पोस्टमार्टम ड्यूटी आैर चिकित्सा शिविरों में जाना पड़ता है। यहा हाल सिर्फ डाक्टर ही नहीं बल्कि चिकित्सा के अन्य संवंर्गों का भी है। काम बढ़ता जा रहा है लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। ओपीडी में कई ऐसे विभाग हैं, जिनमें एक डाक्टर तीन सौ से अधिक मरीज देखता है।
इसके बावजूद इंडोर पेशेंट आैर आनकॉल के लिए तैयार रखना पड़ता है। यह समस्या सिर्फ बलरामपुर अस्पताल की नहीं बल्कि ज्यादातर सरकारी अस्पतालों की है। मूल जरूरतों के लिए संघ को भी आवाज उठानी होगी। 26 मई को बलरामपुर अस्पताल के विज्ञान भवन में मतदान डाले जाएंगे। अध्यक्ष पद पर तीन प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, इनमें डा. अशोक यादव तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं। उपाध्यक्ष सामान्य के लिए तीन पदों पर छह प्रत्याशी, उपाध्यक्ष (महिला) के लिए दो प्रत्याशी, महामंत्री के लिए तीन प्रत्याशी, अपर महामंत्री के लिए चार प्रत्याशी, वित्त सचिव के लिए दो आैर सम्पादक के लिए दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। संघ के राज्य चुनाव अधिकारी डा. राजीव बंसवाल ने बताया कि उपाध्यक्ष (मुख्यालय) के लिए डा. आशुतोष कुमार दुबे निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।