केजीएमयू के गैस्ट्रोसर्जरी विभाग के वरिष्ठ व अंग प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डा. विवेक गुप्ता ने कहा कि किसी भी अंग प्रत्यारोपण करने से पहले प्रत्यारोपण करने वाले व्यक्ति की एक सप्ताह पहले जांच पड़ताल की जाती है। किडनी क्रास मैच की जाती है इसके बाद अगर किडनी निकाली जाती है तो उसके लिए विशेष टीम लगती है, जिसमें विशेषज्ञ डाक्टर किडनी को निकालते है आैर उसके बाद विशेष प्रकार से लगाने वाले व्यक्ति तक ले जायी जाती है। उन्होंने कहा कि ट्रामा सेंटर के आपरेशन थियेटर में जूनियर व रेजीडेंट डाक्टर किडनी को इतनी आसानी से निकाल कर नहीं लगाया जाता है आैर राजधानी व इसके अलावा इस स्तर का कोई निजी क्षेत्र का उच्चस्तरीय अस्पताल भी नहीं है।
पूर्व सीएमओ व नेफ्रोलॉजिस्ट डा. एसएनएस यादव ने कहा कि नियमानुसार पहले स्थानीय सीएमओ के पास शिकायत दर्ज कराकर जांच कमेटी बनायी जाती है, जिसमें विशेषज्ञ डाक्टर,प्रशासनिक अधिकारी व अन्य जिम्मेदार व्यक्ति होते है जो कि तकनीकी पक्ष की जांच करने के बाद आरोप साबित करते है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में गोमती नगर में एक निजी अस्पताल में डाक्टर पर मरीज को मारने का आरोप लगा था। इसके बाद जांच में अस्पताल प्रशासन की कमी निकली थी। केजीएमयू के प्रवक्ता डा. नरसिंह वर्मा ने कहा कि जांच के निर्देश दे दिये गये है, लेकिन ऐसे आरोप से डाक्टर का मनोबल घटता है। वह गंभीर मरीजों का पहले सभी जांच कराये उसके बाद ही इलाज कराये। ताकि वह खुद को सुरक्षित हो सके।















