लखनऊ। बाराबंकी के मरीज की दो वर्ष पहले किडनी चोरी के प्रकरण में किं ग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दो वरिष्ठ डाक्टरों पर बाराबंकी में दर्ज करायी गयी रिपोर्ट का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने विरोध दर्ज किया है। आईएमए लखनऊ शाखा का कहना है कि बिना क्लीनिकल जांच के किसी भी डाक्टर के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराना एक पक्षीय है आैर जल्दबाजी में रिपोर्ट दर्ज करना साजिश प्रतीत होती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक व स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेज कर जांच होने पर दर्ज रिपोर्ट को निरस्त कराने की मांग की है। इस सम्बध में आयोजित पत्रकार वार्ता में डा. संदीप तिवारी व डा. आनंद मिश्र ने अपना पक्ष रखा, जिसमें प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डा. विवेक गुप्ता व पूर्व सीएमओ व नेफ्रोलॉजिस्ट डा. एस एनएस यादव मौजूद थे।
आईएमए लखनऊ शाखा के अध्यक्ष डा. पीके गुप्ता ने आईएमए भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि मरीज की किडनी निकाले जाने के आरोप के मामले में बाराबंकी में आरोपी पक्ष ने रिपोर्ट दर्ज करायी है,जो कि बहुत ही जल्दी गंभीर धाराओं में दर्ज की गयी है। जबकि नियम यह है कि किसी डाक्टर पर रिपोर्ट करने से पहले पुलिस स्थानीय मुख्य चिकित्सा अधिकारी से सम्पर्क करती है, इस मामले में क्लीनिकल जांच कमेटी गठित होती है। इसके बाद ही आरोप साबित होने पर रिपोर्ट दर्ज की जाती है। इस मामले में बहुत जल्द बाजी की गयी है। इसके साथ ही आरोपी ने बाराबंकी से साथ आने वाले डाक्टर का जिक्र तक नहीं किया है, जो कि दो वर्ष पहले उसके साथ ट्रामा सेंटर तक आया था। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में जांच होने पर डाक्टर पर किसी प्रकार की गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज नहीं होना चाहिए। इसकी मांग करते हुए मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक व स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजा गया है। पत्रकार वार्ता में सचिव डा. जिलेदार रावत ने कहा कि बताया जाता है कि इस मरीज की जान खतरे में होता देख आैर मौके पर कोई डोनर न होने पर दो जूनियर डाक्टरों ने अपना ब्लड तक दे दिया था। पत्रकार वार्ता में नर्सिंग होम एसोसिएशन की प्रमुख डा. रमा श्रीवास्तव भी मौजूद थी।















