प्रस्तावित नई औद्योगिक नीति में पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग लगाने पर विशेष बल

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उत्तर प्रदेश में औद्योगिक वातारण सृजित करने एवं पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए यथाशीघ्र नयी औद्योगिक नीति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। औद्योगिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े पूर्वांचल एवं बुन्देलखण्ड क्षेत्र में उद्योगों के विकास पर नई औद्योगिक नीति में विशेष ध्यान रखा गया है।

उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में आज यहां सचिवालय में हुई मंत्रिपरिषद समूह की बैठक में उत्तर प्रदेश औद्योगिक प्रोत्साहन नीति 2017 विषयक प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण में नई नीति में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने पर विशेष बल दिया गया है। बैठक में बताया गया कि रोजगार के सबसे अधिक अवसर सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के क्षेत्र में है। अवस्थापना सुविधाओं के विकास के साथ-साथ एक्सप्रेस मार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों एवं राज्यमार्गों के किनारे औद्योगिक पार्क, औद्योगिक आस्थान, फूड पार्क, आई.टी. पार्क, फार्मा पार्क, कृषि आधारित पार्कों की स्थापना पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है।

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प्रस्तुतीकरण में भूमि की उपलब्धता, ओपेन एक्सेस से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित कराना, वित्तीय प्रोत्साहन के क्षेत्र में ब्याज प्रतिपूर्ति की व्यवस्था करना, एफ.डी.आई. को आकर्षित करने आदि के सम्बन्ध में नई औद्योगिक नीति में व्यवस्था किए जाने पर भी विचार विमर्श हुआ।

उप मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास को निर्देश दिए कि इस नीति में सब कुछ पारदर्शी एवं स्पष्ट होना चाहिए, जिससे उद्यमी को किसी तरह का भ्रम न हो। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हो तो उद्योग जगत से एक बार पुनः विचार-विमर्श कर उनके सार्थक सुझावों को अन्तिम रूप दिए जाने के पूर्व सम्मिलित कर लिया जाय। उन्होंने निर्देश दिए कि बैठक आज आये सुझावों को सम्मिलित करते हुए नई नीति का प्रारूप एक सप्ताह के अन्दर मंत्रिपरिषद समूह के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि मुख्यमंत्री के समक्ष इसका प्रस्तुतीकरण करके इसे अंतिम रूप दिया जा सके।

बैठक में वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल, औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा तथा स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ भी उपस्थित थे। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव आई.टी. संजीव सरन, अपर मुख्य सचिव वित्त अनूप चन्द्र पाण्डेय, अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल, प्रमुख सचिव लघु उद्योग रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास आलोक सिन्हा, प्रमुख सचिव राजस्व अरविन्द कुमार के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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